
देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को सशक्त और विविधता से समृद्ध करने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संविधान के अनुच्छेद 80 के तहत प्रदत्त अधिकारों का प्रयोग करते हुए चार प्रतिष्ठित व्यक्तियों को राज्यसभा के लिए मनोनीत किया है। इन चार नामों में शामिल हैं – वरिष्ठ अधिवक्ता उज्ज्वल निकम, पूर्व विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला, प्रख्यात इतिहासकार मीनाक्षी जैन और केरल के सामाजिक कार्यकर्ता सी. सदानंदन मास्टर।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इन सभी मनोनीत सदस्यों को उनके चयन पर हार्दिक बधाई देते हुए सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर उनकी उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए शुभकामनाएं दीं।
उज्ज्वल निकम – न्याय की रक्षा के सजग प्रहरी
प्रधानमंत्री मोदी ने उज्ज्वल निकम की प्रशंसा करते हुए लिखा कि वह कानून के क्षेत्र में एक अत्यंत समर्पित और सशक्त हस्ती हैं, जिन्होंने संविधान और न्याय व्यवस्था के प्रति अपनी निष्ठा के माध्यम से समाज में विश्वास कायम किया है। उन्होंने कई महत्वपूर्ण मामलों में अभियोजन की भूमिका निभाई, और अपनी दृढ़ता से अपराधियों को सजा दिलाने में सफलता पाई। पीएम मोदी ने कहा कि निकम की उपस्थिति राज्यसभा को न्यायिक और विधिक मामलों में दिशा देने में सहायक होगी।
हर्षवर्धन श्रृंगला – भारत की विदेश नीति के स्थापत्यकार
भारत के पूर्व विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला को राज्यसभा में नामित किया जाना विदेश नीति और रणनीतिक मामलों में गहराई और परिपक्वता जोड़ने वाला कदम माना जा रहा है। पीएम मोदी ने कहा, “हर्षवर्धन श्रृंगला एक बुद्धिजीवी और अनुभवी राजनयिक हैं, जिन्होंने G20 जैसी वैश्विक जिम्मेदारियों में भारत का नेतृत्व कर दुनिया में भारत की प्रतिष्ठा को बढ़ाया है। राज्यसभा में उनका अनुभव राष्ट्रीय हितों की आवाज़ को वैश्विक पटल से जोड़ने का कार्य करेगा।”
मीनाक्षी जैन – इतिहास की विद्वान व्याख्याकार
प्रधानमंत्री ने डॉ. मीनाक्षी जैन की विद्वता का उल्लेख करते हुए लिखा कि “वे एक प्रसिद्ध इतिहासकार, लेखक और शिक्षाविद् हैं जिन्होंने भारतीय इतिहास, संस्कृति और राजनीतिक विचारधारा पर गंभीर शोध कार्य किए हैं। उनके द्वारा किए गए कार्य शैक्षणिक क्षेत्र में नए विमर्श को जन्म देते हैं और राष्ट्र की ऐतिहासिक समझ को गहराई प्रदान करते हैं।” पीएम मोदी ने विश्वास जताया कि उनका ज्ञान संसद की चर्चा को समृद्ध करेगा।
सी. सदानंदन मास्टर – सामाजिक न्याय के प्रतीक
केरल से आने वाले सी. सदानंदन मास्टर एक शिक्षक और सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में अन्याय और भय के विरुद्ध खड़े रहने की प्रेरणा हैं। प्रधानमंत्री ने उन्हें “युवाओं के सशक्तिकरण के प्रतीक” के रूप में वर्णित करते हुए कहा कि उन्होंने जीवन के कठिन दौर में भी राष्ट्र निर्माण के संकल्प को नहीं छोड़ा। उनका जमीनी अनुभव और सामाजिक सेवा का भाव संसद में आम जनता की आवाज़ को मजबूती देगा।
राज्यसभा को मिलेगा विविध दृष्टिकोण और गहराई
इन चार नामांकनों के माध्यम से राज्यसभा को कानून, विदेश नीति, इतिहास और सामाजिक सुधार जैसे क्षेत्रों में गहराई और विविधता मिलेगी। राष्ट्रपति मुर्मू का यह निर्णय भारतीय लोकतंत्र की उस विशेषता को दर्शाता है, जिसमें समाज के विभिन्न क्षेत्रों से उत्कृष्ट योगदान देने वाले व्यक्तियों को संसद में प्रतिनिधित्व देकर नीति निर्माण को व्यापक दृष्टिकोण से समृद्ध किया जाता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने इन सभी नामांकनों को “भारतीय लोकतंत्र की सृजनात्मकता और विविधता का प्रतीक” बताते हुए कहा कि ये सदस्य संसद की गरिमा और सार्थक बहसों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
यह नामांकन न केवल सम्मान का विषय है, बल्कि उन मूल्यों की भी पुन: पुष्टि करता है जिन पर भारतीय गणतंत्र खड़ा है – कौशल, समर्पण और समाज के प्रति सेवा भाव।

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