
कर्नाटक की राजनीति में एक बार फिर मुख्यमंत्री पद को लेकर खींचतान तेज हो गई है। इस बार कांग्रेस के भीतर चल रहे विवाद को नई हवा दी है श्रीशैल पीठ के जगद्गुरु चन्ना सिद्धराम पंडिताराध्य ने। जगद्गुरु ने साफ तौर पर कहा कि अगर सरकार गठन के समय कोई समझौता हुआ था तो पार्टी हाईकमान को उसे अब निभाना चाहिए और प्रदेश अध्यक्ष डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनने का अवसर दिया जाना चाहिए।
जगद्गुरु ने आलाकमान को याद दिलाया वादा
जगद्गुरु चन्ना सिद्धराम पंडिताराध्य ने बागलकोट जिले के अमीनगड में मीडिया से बातचीत के दौरान कहा, “हमारे पास यह जानकारी नहीं है कि सरकार गठन के समय क्या समझौता हुआ था। लेकिन अगर डीके शिवकुमार और सिद्धारमैया के बीच मुख्यमंत्री पद को लेकर कोई सहमति बनी थी तो उसे नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।”
जगद्गुरु ने यह भी कहा कि सत्ता के लिए अंदरूनी खींचतान ठीक नहीं है। नेताओं को राज्य के विकास पर ध्यान देना चाहिए और जनता के हितों को सर्वोपरि रखना चाहिए।
ढाई-ढाई साल के फॉर्मूले पर फिर गरमाई सियासत
कर्नाटक कांग्रेस में ‘ढाई-ढाई साल मुख्यमंत्री’ फॉर्मूला लंबे समय से चर्चा में है। वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने बहुमत हासिल कर सरकार बनाई थी। उस वक्त मुख्यमंत्री पद की रेस में डीके शिवकुमार भी मजबूत दावेदार थे, लेकिन अंतिम समय में सिद्धारमैया को मौका मिला और डीके शिवकुमार को डिप्टी सीएम और प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर जिम्मेदारी दी गई थी। तब कयास लगाए गए थे कि दोनों नेताओं के बीच अंदरखाने कोई फार्मूला बना है, जिसके तहत सिद्धारमैया ढाई साल और बाकी बचे ढाई साल डीके शिवकुमार सीएम रहेंगे।
कांग्रेस विधायकों में बंटा नजरिया
जैसे-जैसे सिद्धारमैया सरकार के ढाई साल पूरे होने को आए हैं, डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाने की मांग फिर जोर पकड़ने लगी है। कांग्रेस के एक धड़े का दावा है कि पार्टी नेतृत्व ने स्पष्ट सहमति दी थी, जिसे अब लागू किया जाना चाहिए। वहीं, सिद्धारमैया के समर्थक विधायक नेतृत्व परिवर्तन की बात को नकारते रहे हैं। उनका कहना है कि सिद्धारमैया ने सरकार को स्थिर रखा है और पांच साल का कार्यकाल पूरा करेंगे।
जगद्गुरु के बयान से डीके खेमे को मिला बल
विशेषज्ञों का मानना है कि श्रीशैल पीठ के जगद्गुरु के इस बयान से डीके शिवकुमार समर्थकों को नया बल मिलेगा। कर्नाटक की राजनीति में धार्मिक मठों और लिंगायत व वीरशैव समुदाय के संतों की बात को गंभीरता से लिया जाता रहा है। जगद्गुरु का यह बयान कांग्रेस हाईकमान पर भी दबाव बना सकता है।
‘राज्य हित में राजनीति से ऊपर उठें नेता’
जगद्गुरु चन्ना सिद्धराम पंडिताराध्य ने नेताओं से आह्वान किया कि वे आपसी मतभेदों से ऊपर उठकर राज्य के विकास पर ध्यान दें। उन्होंने कहा, “डीके शिवकुमार और सिद्धारमैया दोनों ही अनुभवी और कुशल राजनेता हैं। पर आपसी सहमति का सम्मान किया जाना जरूरी है। नेतृत्व परिवर्तन से ज्यादा जरूरी राज्य के लोगों के हित हैं।”
क्या होगा अगला कदम?
अब सबकी नजरें कांग्रेस हाईकमान पर टिकी हैं कि वह इस बयान को किस तरह लेता है। अभी तक आलाकमान की ओर से इस विवाद पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। लेकिन माना जा रहा है कि अगले कुछ महीनों में प्रदेश कांग्रेस में बड़ी बैठकों और अंदरूनी समीक्षाओं के जरिए स्थिति साफ हो सकती है।
कर्नाटक कांग्रेस में बढ़ती अंदरूनी खींचतान
राज्य की सियासत में यह पहला मौका नहीं है जब डीके शिवकुमार को सीएम बनाने की मांग जोर पकड़ी हो। पिछले दो सालों में कई बार समर्थक विधायक और संत समाज डीके शिवकुमार के पक्ष में आवाज उठा चुके हैं। अब देखना यह होगा कि क्या जगद्गुरु का यह ताजा बयान सत्ता समीकरणों में कोई बदलाव ला पाता है या नहीं।

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