
बिहार विधानसभा के मानसून सत्र में एसआईआर (Special Intensive Revision) को लेकर विपक्ष ने जोरदार हंगामा किया। विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि केंद्र के इशारे पर चुनाव आयोग वोटर लिस्ट वेरिफिकेशन के नाम पर गरीब और पिछड़े वर्गों को उनके मताधिकार से वंचित करना चाहता है।
जदयू का पलटवार – तेजस्वी के आरोपों में सच्चाई नहीं
तेजस्वी यादव के आरोपों पर जनता दल यूनाइटेड (जदयू) ने तीखी प्रतिक्रिया दी। पार्टी के प्रवक्ता नीरज कुमार ने तेजस्वी को “राजनीति का फरेबी” करार दिया। उन्होंने कहा कि तेजस्वी एसआईआर का विरोध सिर्फ इसलिए कर रहे हैं क्योंकि उन्हें डर है कि फर्जी मतदाताओं के नाम हटने से उनका वोट बैंक कमजोर हो जाएगा।
“94 प्रतिशत लोगों ने पूरी की प्रक्रिया”
नीरज कुमार ने बताया कि चुनाव आयोग ने मतदाता सूची सत्यापन के लिए पर्याप्त व्यवस्था की है और अब तक 94 प्रतिशत लोगों ने प्रक्रिया पूरी कर ली है। ऐसे में यह कहना कि गरीबों को वोट के अधिकार से वंचित किया जा रहा है, पूरी तरह गलत और भ्रामक है।

जातिगत जनगणना का हवाला
जदयू प्रवक्ता ने जातिगत जनगणना रिपोर्ट के पृष्ठ 192 का हवाला देते हुए कहा कि सबसे अधिक पलायन सामान्य वर्ग (5.68%) का हुआ है, जबकि पिछड़ा वर्ग (3.30%), अति पिछड़ा वर्ग (2.50%) और अनुसूचित जाति का पलायन अपेक्षाकृत कम है। इससे तेजस्वी के तर्क तथ्यहीन और राजनीतिक स्वार्थ प्रेरित साबित होते हैं।
विपक्ष पर तीखा तंज
नीरज कुमार ने कहा कि विपक्ष का काम केवल सरकार का विरोध करना रह गया है। “उनके मुंह से कभी सरकार की तारीफ नहीं निकल सकती। वे हर मुद्दे को राजनीतिक रंग देने में लगे रहते हैं, चाहे वह जनहित का हो या लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जुड़ा हुआ।”
बिहार में एसआईआर की प्रक्रिया को लेकर सत्ताधारी दल और विपक्ष आमने-सामने हैं। जहां एक ओर तेजस्वी यादव इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बता रहे हैं, वहीं जदयू इसे फर्जीवाड़ा हटाने की पारदर्शी प्रक्रिया बता रहा है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और भी अधिक राजनीतिक गर्मी ला सकता है।

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