
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा चुनाव आयोग पर लगाए गए ‘वोट चोरी’ के आरोपों को लेकर कांग्रेस और मुख्य चुनाव आयुक्त के बीच तीखी बयानबाजी जारी है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने राहुल गांधी से इन आरोपों पर सात दिनों के भीतर हलफनामा देने या देश से माफी मांगने की मांग की थी, जिस पर कांग्रेस ने कड़ा रुख अपनाया है।
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने मुख्य चुनाव आयुक्त के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए साफ कर दिया है कि राहुल गांधी अपने आरोपों पर माफी नहीं मांगेंगे। मसूद ने कहा कि राहुल गांधी ने जो कुछ भी कहा है, वह पूरी तरह से तथ्यों और सबूतों पर आधारित है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ये आरोप मनगढ़ंत या बेबुनियाद नहीं हैं, बल्कि चुनाव आयोग के दस्तावेजों की जांच-पड़ताल के बाद सामने आए हैं।
इमरान मसूद ने कहा, “राहुल गांधी ने जो कहा वह डंके की चोट पर कहा है, माफी मांगने का सवाल ही नहीं उठता है।” उन्होंने यह भी तंज कसा कि राहुल गांधी सावरकर नहीं हैं जो माफी मांगें। यह बयान बीजेपी के हिंदुत्ववादी विचारक वीर सावरकर पर कांग्रेस के पुराने हमलों को याद दिलाता है।
कांग्रेस सांसद ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार ने राहुल गांधी के ‘वोट चोरी’ के आरोपों से जुड़े सबसे महत्वपूर्ण सवाल को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया है। मसूद ने कहा कि चुनाव आयोग ने उन कथित फर्जी मतदाताओं और उनकी पहचान का कोई जिक्र नहीं किया, जो लोकसभा चुनावों में पकड़े गए थे।

उन्होंने बिहार का उदाहरण देते हुए कहा कि एसआईआर (SIR) के माध्यम से कई जिंदा लोगों को मतदाता सूची में ‘मृत’ घोषित कर दिया गया है। उन्होंने दावा किया कि कुछ ऐसे ‘मृत’ मतदाताओं ने तो राहुल गांधी के साथ चाय भी पी है। यह दावा चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
इमरान मसूद ने महाराष्ट्र के राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन को एनडीए का उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार घोषित किए जाने पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि यह एनडीए का फैसला है और कांग्रेस इस पर अपना फैसला खुद करेगी। वहीं, ‘बंगाल फाइल्स’ के ट्रेलर पर उन्होंने कहा कि ‘उदयपुर फाइल्स’ पहले ही फ्लॉप हो चुकी है, और अब फिल्म के निदेशक को सुरक्षा दी गई है।
कुल मिलाकर, राहुल गांधी और चुनाव आयोग के बीच यह टकराव भारतीय लोकतंत्र में चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर एक बड़ी बहस को जन्म दे रहा है। कांग्रेस इस मुद्दे को जनता के बीच ले जाने की तैयारी में है, जबकि चुनाव आयोग अपनी साख बचाने की कोशिश कर रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह राजनीतिक लड़ाई क्या मोड़ लेती है।

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