
भारतीय कृषि को टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को नई दिल्ली के पूसा स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) परिसर से ‘राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन’ (एनएनएफएम) का शुभारंभ करेंगे। इस बहुप्रतीक्षित पहल का उद्देश्य किसानों की लागत को कम करना, मिट्टी के स्वास्थ्य को बेहतर बनाना और भारत को टिकाऊ कृषि में वैश्विक नेता के रूप में स्थापित करना है।
केंद्र की पर्यावरण के प्रति प्रतिबद्धता
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गुरुवार को एक प्रेस वार्ता में इस मिशन के शुभारंभ की पुष्टि की थी। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी 23 अगस्त को पूसा (दिल्ली) स्थित आईसीएआर में राष्ट्रीय प्राकृतिक कृषि मिशन का शुभारंभ करेंगे।” उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह पहल पर्यावरण के प्रति उत्तरदायी कृषि विकास के लिए केंद्र सरकार की मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
यह मिशन भारत सरकार की एक व्यापक राष्ट्रीय रणनीति का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य खेती में रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों पर निर्भरता को कम करना है। प्राकृतिक खेती के तरीकों को अपनाकर, किसान न केवल अपनी लागत कम कर सकते हैं, बल्कि अपनी मिट्टी को भी स्वस्थ रख सकते हैं। इससे दीर्घकालिक रूप से कृषि की उत्पादकता और स्थिरता बढ़ेगी।
मिशन के प्रमुख लक्ष्य
‘राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन’ (एनएनएफएम) को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 25 नवंबर, 2024 को मंजूरी दी थी। इसे 15वें वित्त आयोग चक्र (2025-26) के अंत तक एक स्वतंत्र केंद्र प्रायोजित योजना के रूप में लागू किया जा रहा है। इस मिशन के मुख्य लक्ष्य निम्नलिखित हैं:
मिट्टी की उर्वरता में सुधार: यह मिशन प्राकृतिक खेती के वैज्ञानिक तरीकों पर केंद्रित है, जो मिट्टी की उर्वरता में सुधार करने में मदद करते हैं।
रासायनिक निर्भरता में कमी: इसका लक्ष्य केमिकल्स पर निर्भरता को कम करना है, जिससे पर्यावरण को होने वाले नुकसान को रोका जा सके।
जलवायु सहनशीलता: प्राकृतिक खेती कृषि की समग्र जलवायु सहनशीलता को बढ़ाती है, जिससे किसानों को जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का सामना करने में मदद मिलती है।
पर्यावरण संरक्षण: यह पहल पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन से निपटने के वैश्विक प्रयासों में भारत के योगदान को मजबूत करेगी।
‘विकसित कृषि संकल्प अभियान’
‘राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन’ को आगे बढ़ाने के लिए, सरकार ने एक और महत्वपूर्ण अभियान शुरू करने का फैसला किया है। ‘विकसित कृषि संकल्प अभियान’ आगामी रबी सीजन के दौरान 3 अक्टूबर से 18 अक्टूबर तक चलाया जाएगा। ‘विजय पर्व’ थीम वाले इस अभियान का उद्देश्य मिशन के संदेश को देश भर के किसानों, शोधकर्ताओं और नीति निर्माताओं तक पहुंचाना है, ताकि वे एक समन्वित राष्ट्रीय प्रयास में एक साथ आ सकें।
यह मिशन भारतीय कृषि में एक बड़ा बदलाव ला सकता है। आईसीएआर और राज्य सरकारें इस पहल की व्यापक तैयारी कर रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भारत को न केवल खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाएगा, बल्कि जैविक और प्राकृतिक उत्पादों के वैश्विक बाजार में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में भी स्थापित करेगा।

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