
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी दो दिवसीय जापान यात्रा की शुरुआत करते हुए शुक्रवार को टोक्यो में कदम रखा। यह दौरा दोनों देशों के बीच संबंधों को एक नई ऊंचाई देने के उद्देश्य से किया जा रहा है। प्रधानमंत्री 15वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे और अपने जापानी समकक्ष शिगेरु इशिबा के साथ पहली औपचारिक द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। यह प्रधानमंत्री मोदी की आठवीं जापान यात्रा है, जो भारत द्वारा टोक्यो के साथ अपनी विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी को दी जाने वाली अहमियत को दर्शाता है।
टोक्यो के हानेडा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर प्रधानमंत्री का गर्मजोशी से स्वागत किया गया। इस दौरान भारत में जापान के राजदूत ओनो केइची और जापान में भारत के राजदूत सिबी जॉर्ज सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। प्रधानमंत्री मोदी ने आगमन पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “टोक्यो पहुंच गया हूं। भारत और जापान अपने विकासात्मक सहयोग को मजबूत कर रहे हैं, ऐसे में मैं इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री इशिबा और अन्य लोगों के साथ बातचीत करने के लिए उत्सुक हूं, जिससे मौजूदा साझेदारियों को और मजबूत करने और सहयोग के नए रास्ते तलाशने का अवसर मिलेगा।”
भारतीय समुदाय का उमड़ता जनसैलाब
प्रधानमंत्री मोदी के आगमन के साथ ही टोक्यो में भारतीय संस्कृति की अद्भुत झलक देखने को मिली। टोक्यो के इंपीरियल होटल में प्रधानमंत्री का भव्य स्वागत करने के लिए भारतीय समुदाय के लोग भारी संख्या में जमा हुए थे। पूरे होटल परिसर में देशभक्ति का माहौल था, जहां लोग ‘मोदी-मोदी’, ‘भारत माता की जय’ और ‘वंदे मातरम’ के नारे लगा रहे थे। हाथों में तिरंगा लिए लोग अपने प्रधानमंत्री की एक झलक पाने और उनसे मिलने के लिए बेताब दिख रहे थे।
इस दौरान भारतीय मूल के नागरिक जिस राज्य से आते थे, उस राज्य की भाषा में भी प्रधानमंत्री का अभिवादन करते नजर आए, जो विदेशों में भी भारतीय संस्कृति की विविधता को दर्शाता है। प्रधानमंत्री ने सभी का हाथ जोड़कर अभिवादन स्वीकार किया और लोगों से व्यक्तिगत तौर पर मुलाकात भी की। उन्होंने कई लोगों के साथ तस्वीरें भी खिंचवाईं। प्रधानमंत्री के स्वागत में पारंपरिक नृत्य और संगीत का भी आयोजन किया गया, जिसे देखकर वे मंत्रमुग्ध नजर आए। भारतीय समुदाय का यह उत्साह दोनों देशों के बीच मजबूत जन-जन के संबंधों की कहानी कहता है।
कूटनीतिक एजेंडा और वैश्विक साझेदारी
प्रधानमंत्री मोदी और जापान के प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा के बीच होने वाली द्विपक्षीय वार्ता का एजेंडा काफी व्यापक है। दोनों नेता भारत-जापान विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी की प्रगति की समीक्षा करेंगे, जिसमें रक्षा और सुरक्षा, व्यापार और निवेश, डिजिटल प्रौद्योगिकी, जलवायु कार्रवाई और नवाचार जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित होगा।
रक्षा और सुरक्षा के क्षेत्र में, दोनों देश हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए अपनी भागीदारी को और गहरा करने की संभावनाओं पर विचार करेंगे। इसके अलावा, भारत जापान के साथ व्यापार घाटे को कम करने और जापानी उद्योगपतियों को भारत में निवेश के लिए आकर्षित करने की दिशा में भी काम करेगा। यह यात्रा भारत के ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ जैसी पहलों के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि जापान दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक है और तकनीकी रूप से काफी उन्नत है।

प्रधानमंत्री मोदी जापानी उद्योगपतियों और राजनीतिक नेताओं से भी मुलाकात करेंगे ताकि आर्थिक सहयोग को और गहरा किया जा सके और भारत के उभरते क्षेत्रों में निवेश को बढ़ावा दिया जा सके।

हिंद-प्रशांत क्षेत्र में संतुलन साधने की रणनीति
यह यात्रा सिर्फ द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका एक गहरा भू-राजनीतिक महत्व भी है। चीन के बढ़ते प्रभाव के बीच, भारत और जापान दोनों ही हिंद-प्रशांत क्षेत्र में एक स्वतंत्र, खुले और समावेशी वातावरण के लिए प्रतिबद्ध हैं। दोनों नेताओं के बीच इस मुद्दे पर चर्चा होने की उम्मीद है, साथ ही सतत विकास और वैश्विक शांति पहलों पर भी बात होगी।
यह ध्यान देने योग्य है कि प्रधानमंत्री मोदी अपनी जापान यात्रा पूरी करने के बाद शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के 25वें राष्ट्राध्यक्ष परिषद की बैठक में भाग लेने के लिए चीन रवाना होंगे। यह एक साथ दोनों महत्वपूर्ण देशों की यात्रा भारत की संतुलित और बहुआयामी विदेश नीति को दर्शाती है, जहां भारत अपने रणनीतिक हितों को साधने के लिए अलग-अलग मंचों पर अलग-अलग देशों के साथ मिलकर काम कर रहा है।
कुल मिलाकर, प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा न केवल भारत-जापान संबंधों को मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है, बल्कि यह भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका और उसकी कूटनीतिक कुशलता को भी प्रदर्शित करता है।

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