
बिहार की राजनीति में एक बार फिर गर्माहट आ गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के विरोध में सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने पूरे प्रदेश में ‘बिहार बंद’ का आह्वान किया, जिसका व्यापक असर देखने को मिला। गुरुवार को पटना से लेकर भागलपुर, मोतिहारी और सासाराम जैसे शहरों में एनडीए के कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए और कांग्रेस-राजद नेताओं के खिलाफ जमकर विरोध प्रदर्शन किया।
राहुल और तेजस्वी निशाने पर
यह विरोध प्रदर्शन उस घटना के बाद शुरू हुआ, जिसमें दरभंगा में राहुल गांधी की ‘वोटर अधिकार यात्रा’ के दौरान प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी की गई थी। एनडीए कार्यकर्ताओं ने इस बयान को प्रधानमंत्री पद की गरिमा के खिलाफ बताया और इसके विरोध में राज्यव्यापी बंद का आयोजन किया।
पटना के अनीसाबाद और डाकबंगला चौराहा जैसे प्रमुख स्थानों पर कार्यकर्ताओं ने जुलूस निकाला और राहुल गांधी व तेजस्वी यादव के खिलाफ नारेबाजी की। उन्होंने पोस्टर और बैनरों के माध्यम से अपना गुस्सा जाहिर किया। एक भाजपा कार्यकर्ता ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, “हम सड़कों पर इसलिए हैं, क्योंकि राहुल गांधी की रैली के दौरान प्रधानमंत्री के खिलाफ अभद्र और गंदी टिप्पणी की गई। यह पूरी तरह अनुचित था।”
विरोध प्रदर्शन का असर अन्य शहरों में भी दिखा। भागलपुर में सुबह से ही बाजार बंद रहे और सड़कों पर कार्यकर्ताओं का जमावड़ा लगा रहा। मोतिहारी में भी महिला कार्यकर्ताओं ने विरोध का नेतृत्व किया, जो यह दर्शाता है कि यह मुद्दा केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि आम जनता के बीच भी आक्रोश पैदा कर रहा है। सासाराम में भी एनडीए कार्यकर्ताओं ने सड़कों को जाम कर दिया, जिससे यातायात बाधित हुआ।

‘जंगलराज’ की वापसी का आरोप
एनडीए के इस विरोध प्रदर्शन को जनता दल यूनाइटेड (JDU) का भी पूरा समर्थन मिला। जदयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने कहा कि महागठबंधन के लोगों ने प्रधानमंत्री को अपमानित करने और उनके खिलाफ गाली-गलौच करने का काम किया है, जो भारतीय परंपरा को कलंकित करता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि महागठबंधन के नेता माफी भी मांगने को तैयार नहीं हैं, जिससे उनकी मंशा पर सवाल उठते हैं। कुशवाहा ने तीखे शब्दों में कहा, “विपक्ष क्या अराजकता फैलाना चाहता है? क्या वे जंगलराज को वापस लाना चाहते हैं?” यह बयान विपक्षी गठबंधन पर सीधा हमला है और यह दर्शाता है कि एनडीए इस मुद्दे को आगामी चुनावों में एक प्रमुख हथियार के रूप में इस्तेमाल करेगा।

मर्यादा बनाम बयानबाजी
एनडीए द्वारा बुलाया गया यह ‘बिहार बंद’ केवल एक विरोध प्रदर्शन नहीं है, बल्कि यह एक राजनीतिक संदेश भी है। यह सत्ताधारी गठबंधन की ओर से विपक्ष को यह बताने की कोशिश है कि राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता में भी एक लक्ष्मण रेखा होती है, जिसे पार नहीं किया जाना चाहिए। प्रधानमंत्री के पद की गरिमा पर हमला करने के आरोप लगाकर एनडीए जनता के बीच एक भावनात्मक लहर पैदा करने का प्रयास कर रहा है।
यह बंद यह भी दर्शाता है कि एनडीए के घटक दल, जैसे भाजपा और जदयू, इस मुद्दे पर एकजुट हैं और एक-दूसरे का समर्थन कर रहे हैं। आने वाले विधानसभा चुनावों में, यह मुद्दा एक बड़ा राजनीतिक विवाद बन सकता है, जिसमें एनडीए अपनी स्थिति को मजबूत करने की कोशिश करेगा और विपक्ष पर राजनीतिक मर्यादा को भंग करने का आरोप लगाएगा।

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