
भारत में उपराष्ट्रपति चुनाव 2025 के लिए राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) ने शनिवार को एक बड़ा ऐलान करते हुए विपक्षी ‘इंडिया’ ब्लॉक के उम्मीदवार और पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज न्यायमूर्ति बी. सुदर्शन रेड्डी को अपना समर्थन देने की घोषणा की है। यह फैसला राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के उम्मीदवार सी.पी. राधाकृष्णन के खिलाफ ‘इंडिया’ ब्लॉक की स्थिति को मजबूत कर सकता है।
एआईएमआईएम के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट के जरिए इस फैसले की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि तेलंगाना के मुख्यमंत्री कार्यालय ने उनसे संपर्क किया और उपराष्ट्रपति चुनाव में न्यायमूर्ति रेड्डी के समर्थन का अनुरोध किया। ओवैसी ने कहा कि उनकी पार्टी ने इस अनुरोध पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है और वे पूरी तरह से न्यायमूर्ति रेड्डी का समर्थन करेंगे।
समर्थन के पीछे के कारण
ओवैसी ने अपनी पोस्ट में इस समर्थन के पीछे के कारणों को स्पष्ट किया। उन्होंने लिखा, “न्यायमूर्ति रेड्डी एक हैदराबादी हैं और एक सम्मानित न्यायविद के रूप में उनकी पहचान है।” उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से न्यायमूर्ति रेड्डी से बात की और उन्हें शुभकामनाएं दीं। ओवैसी ने इस बात पर गर्व व्यक्त किया कि तेलंगाना से जुड़े एक व्यक्ति को इस पद के लिए चुना गया है।
उन्होंने इस कदम को संवैधानिक मूल्यों और लोकतंत्र की रक्षा से जोड़ा, जो कि उनके अनुसार न्यायमूर्ति रेड्डी के पूरे करियर का आधार रहा है। ओवैसी ने यह भी संकेत दिया कि यह निर्णय पार्टी के सिद्धांतों और क्षेत्रीय पहचान को दर्शाता है। यह एक ऐसा कदम है जो केवल राजनीतिक लाभ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सिद्धांतों और मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है।

चुनावी समीकरणों पर असर
उपराष्ट्रपति पद का चुनाव 9 सितंबर को होने वाला है। इस चुनाव में एनडीए के उम्मीदवार सी.पी. राधाकृष्णन के सामने ‘इंडिया’ ब्लॉक के बी. सुदर्शन रेड्डी खड़े हैं। एआईएमआईएम के समर्थन की घोषणा तेलंगाना की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ मानी जा रही है। भले ही संसद में एआईएमआईएम के सांसदों की संख्या बहुत अधिक न हो, लेकिन उनका समर्थन ‘इंडिया’ ब्लॉक के लिए एक नैतिक और प्रतीकात्मक जीत है। यह तेलंगाना में राजनीतिक एकजुटता का भी संकेत देता है, जहाँ एआईएमआईएम का प्रभाव रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ओवैसी का यह कदम केवल उपराष्ट्रपति चुनाव तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भविष्य में तेलंगाना और राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक गठबंधनों के लिए भी रास्ते खोल सकता है। तेलंगाना के मुख्यमंत्री और अन्य राजनीतिक हलकों ने भी इस समर्थन को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रियाएं दी हैं, जो यह दर्शाता है कि यह निर्णय दोनों पक्षों के लिए लाभकारी माना जा रहा है।
इस घोषणा से चुनावी माहौल और गर्म हो गया है। जहां एक तरफ ‘इंडिया’ ब्लॉक अपने उम्मीदवार की स्थिति मजबूत होने से उत्साहित है, वहीं दूसरी तरफ एनडीए के सामने एक नई चुनौती खड़ी हो गई है। यह चुनाव न सिर्फ दो उम्मीदवारों के बीच की लड़ाई है, बल्कि यह दो बड़े राजनीतिक गठबंधनों की ताकत और रणनीति का भी एक महत्वपूर्ण परीक्षण है।

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