
राजस्थान विधानसभा ने मंगलवार को ‘विधि विरुद्ध धर्म परिवर्तन प्रतिषेध विधेयक 2025’ पारित कर दिया। हंगामे और विपक्षी कांग्रेस के बहिष्कार के बीच ध्वनिमत से पारित इस विधेयक को राज्य सरकार ने मतांतरण रोकने की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया। अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने हंगामे के बीच बिल को पास कराया।
सामूहिक मतांतरण पर कठोर दंड
नए कानून के तहत, सामूहिक मतांतरण करवाने वाली संस्थाओं पर कम से कम 20 साल की सजा और अधिकतम उम्रकैद का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही 25 लाख रुपये से लेकर अधिकतम एक करोड़ रुपये तक जुर्माना भी लगाया जा सकेगा। इतना ही नहीं, यदि किसी भवन का उपयोग मतांतरण के लिए किया गया है, तो प्रशासन उसे सीज या ध्वस्त कर सकता है।
विदेशी मदद लेने पर भी कार्रवाई
विधेयक में यह भी स्पष्ट किया गया है कि विदेशी या अवैध संस्थानों से आर्थिक सहायता लेकर मतांतरण करवाने वालों को 10 से 20 साल तक की कैद और न्यूनतम 20 लाख रुपये जुर्माना भुगतना पड़ेगा। ऐसे मामलों में प्रशासनिक जांच के बाद स्थानीय निकाय अवैध निर्माण पर बुलडोजर भी चला सकेगा।
शादी और मतांतरण को जोड़ा गया
विधेयक में शादी के नाम पर मतांतरण को भी अपराध की श्रेणी में रखा गया है। यदि कोई व्यक्ति बहला-फुसलाकर, झूठे वादे या गलत जानकारी देकर शादी करता है और फिर धर्म परिवर्तन करवाता है, तो यह अपराध माना जाएगा। ऐसे मामलों में लव जिहाद की परिभाषा के तहत कार्रवाई होगी और अदालत से ऐसी शादी को शून्य घोषित किया जा सकेगा।
घर वापसी अपराध नहीं
विधेयक में स्पष्ट किया गया है कि घर वापसी यानी अपने मूल धर्म में लौटना मतांतरण की श्रेणी में नहीं आएगा। इसका अर्थ है कि यदि कोई व्यक्ति अपने पूर्वजों के धर्म में वापस लौटता है, तो उस पर कोई कानूनी कार्रवाई नहीं होगी।

गैर-जमानती अपराध घोषित
जबरन धर्म परिवर्तन को गैर-जमानती अपराध घोषित किया गया है। इस श्रेणी में दोषी पाए जाने पर कम से कम सात साल और अधिकतम 14 साल की कैद तथा पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा।
राजनीतिक माहौल में गरमाहट
विधेयक के पारित होते ही राजनीतिक हलकों में गर्माहट आ गई है। विपक्षी कांग्रेस ने बहस में हिस्सा नहीं लिया और सरकार पर समाज को बांटने का आरोप लगाया। वहीं, सत्तापक्ष ने इसे “सांप्रदायिक सौहार्द और सांस्कृतिक सुरक्षा” का कदम करार दिया।
राजस्थान सरकार का यह कानून अब देशभर में चर्चा का विषय बन गया है। कठोर दंड और भारी जुर्माने के प्रावधानों ने इसे सबसे सख्त मतांतरण विरोधी कानूनों में शामिल कर दिया है। आने वाले दिनों में इसके सामाजिक और राजनीतिक असर पर सबकी निगाहें टिकी रहेंगी।

गांव से लेकर देश की राजनीतिक खबरों को हम अलग तरीके से पेश करते हैं। इसमें छोटी बड़ी जानकारी के साथ साथ नेतागिरि के कई स्तर कवर करने की कोशिश की जा रही है। प्रधान से लेकर प्रधानमंत्री तक की राजनीतिक खबरें पेश करने की एक अलग तरह की कोशिश है।



