
वर्ष 2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान साड़ी वितरण के मामले में समाजवादी पार्टी सरकार में मंत्री रहे गायत्री प्रसाद प्रजापति के खिलाफ अभियोजन पक्ष ने शुक्रवार को अदालत में आरोप पत्र दाखिल कर दिया। यह मामला चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन से जुड़ा है, जिसमें हजारों साड़ियों की बरामदगी हुई थी। अब इस मामले की अगली सुनवाई 10 अक्टूबर को निर्धारित की गई है।
अदालत में पेश हुए पूर्व मंत्री, बचाव में दी सफाई
शुक्रवार को गायत्री प्रसाद प्रजापति की पेशी अपर मुख्य न्यायाधीश कोर्ट नंबर एक के पीठासीन अधिकारी मोहम्मद सादित की अदालत में हुई। अभियोजन पक्ष की ओर से अभियोजन अधिकारी विजय कुमार रावत ने दलीलें पेश कीं, जबकि बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता सैय्यद नाजिस रजा ने पूर्व मंत्री का पक्ष रखा। प्रजापति ने आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए कहा, “जिन साड़ियों की बरामदगी की बात कही जा रही है, उनमें कमल का फूल बना हुआ था। यह सब भाजपाइयों की साजिश है।”
साड़ियों की बरामदगी और पुलिस कार्रवाई
यह मामला 11 जनवरी 2017 का है, जब विधानसभा चुनाव के दौरान हुसेनगंज थाने की पुलिस असनी पुल के समीप चेकिंग अभियान चला रही थी। इसी दौरान एक लोडर वाहन की तलाशी में साड़ियों के 42 बंडल बरामद हुए थे। प्रत्येक बंडल में 106 साड़ियां थीं, यानी कुल 4,452 साड़ियां मिली थीं। लोडर चालक अंकित शुक्ला ने पुलिस को बताया था कि ये साड़ियां अमेठी में गायत्री प्रसाद प्रजापति के चुनाव प्रचार के लिए बांटने हेतु ले जाई जा रही थीं।
पुलिस ने इस मामले में आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए पूर्व मंत्री के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। इसके साथ ही लोडर चालक अंकित शुक्ला, शैलेष मिश्र और हिदायत उल्ला बेग को भी नामजद किया गया था। बाद में 2 जनवरी 2020 को इन तीनों को अर्थदंड से दंडित किया गया।
सपा नेताओं की मौजूदगी
पूर्व मंत्री की पेशी की खबर मिलते ही कई समाजवादी पार्टी के नेता कचहरी पहुंचे। इनमें पूर्व ब्लॉक प्रमुख रीता प्रजापति और सपा के जिला महामंत्री चौधरी मंजर यार प्रमुख रूप से शामिल रहे। इन नेताओं ने प्रजापति के समर्थन में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और मामले को राजनीतिक साजिश बताया।
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर
गायत्री प्रसाद प्रजापति ने अदालत में दिए अपने बयान में स्पष्ट रूप से कहा कि यह मामला भाजपा की साजिश है। उन्होंने दावा किया कि बरामद की गई साड़ियों पर कमल का निशान था, जो भाजपा का चुनाव चिन्ह है। ऐसे में यह आरोप उन पर लगाना पूरी तरह से गलत है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें राजनीतिक रूप से निशाना बनाया जा रहा है।
अगली सुनवाई 10 अक्टूबर को
अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 10 अक्टूबर की तिथि निर्धारित की है। इस दिन अभियोजन और बचाव पक्ष अपनी दलीलें आगे बढ़ाएंगे। यह देखना दिलचस्प होगा कि अदालत इस मामले में क्या रुख अपनाती है और क्या पूर्व मंत्री को दोषमुक्त किया जाता है या मामला आगे बढ़ता है।
गायत्री प्रसाद प्रजापति का राजनीतिक सफर
गायत्री प्रसाद प्रजापति समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता रहे हैं और अखिलेश यादव सरकार में मंत्री पद पर आसीन रहे। अमेठी से उनका राजनीतिक प्रभाव रहा है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में वे कई कानूनी मामलों में उलझे रहे हैं। साड़ी वितरण का यह मामला भी उनके राजनीतिक जीवन में एक और विवाद के रूप में सामने आया है।
चुनावी माहौल में बढ़ती कानूनी सक्रियता
यह मामला एक बार फिर चुनावी आचार संहिता के उल्लंघन और राजनीतिक दलों की प्रचार रणनीतियों पर सवाल खड़ा करता है। जहां एक ओर अभियोजन पक्ष इसे कानून का उल्लंघन मान रहा है, वहीं बचाव पक्ष इसे राजनीतिक प्रतिशोध बता रहा है। आगामी सुनवाई में इस मामले की दिशा तय होगी, जो न केवल गायत्री प्रसाद प्रजापति के लिए बल्कि चुनावी नैतिकता के लिए भी अहम साबित हो सकती है।

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