
पश्चिम एशिया में जारी ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच त्रिकोणीय संघर्ष ने वैश्विक वित्तीय बाजारों में हलचल तेज कर दी है। शेयर बाजारों में अस्थिरता के बीच निवेशक अब सुरक्षित निवेश (Safe Haven) के लिए सोने और चांदी की ओर रुख कर रहे हैं। बुधवार के शुरुआती कारोबारी सत्र में मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर कीमती धातुओं की कीमतों में जबरदस्त तेजी देखने को मिली है।
MCX पर सोने की कीमतों में उछाल
बुधवार को सोने की कीमतों ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ी। एमसीएक्स पर अप्रैल डिलीवरी वाला गोल्ड फ्यूचर्स 1.44 प्रतिशत यानी 2,324 रुपये की बढ़त के साथ 1,63,432 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गया। विशेषज्ञों का मानना है कि युद्ध की अनिश्चितता के कारण निवेशकों का भरोसा पीली धातु पर बढ़ा है, जिससे कीमतों को निचले स्तरों से सहारा मिल रहा है।

चांदी की चमक हुई और तेज
सोने के मुकाबले चांदी में और भी बड़ी तेजी दर्ज की गई। मई डिलीवरी वाला सिल्वर फ्यूचर्स 2.65 प्रतिशत यानी करीब 7,021 रुपये उछलकर 2,72,339 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर कारोबार करता देखा गया। औद्योगिक मांग के साथ-साथ निवेश मांग बढ़ने से चांदी की कीमतों में यह बड़ा सुधार देखने को मिला है, जबकि पिछले सत्र में इसमें भारी गिरावट आई थी।
पिछले सत्र की गिरावट और डॉलर का प्रभाव
इस तेजी से ठीक पहले वाले सत्र में सोने और चांदी में मुनाफावसूली और डॉलर की मजबूती के कारण गिरावट देखी गई थी। अप्रैल गोल्ड फ्यूचर्स 3 प्रतिशत तक गिरा था, वहीं चांदी 5 प्रतिशत टूटी थी। इसका मुख्य कारण डॉलर इंडेक्स का कई महीनों के उच्च स्तर 99.33 पर पहुंचना और अमेरिकी 10 साल के बॉन्ड यील्ड का 4 प्रतिशत के पार जाना था। हालांकि, युद्ध की बढ़ती तीव्रता ने इन तकनीकी कारकों पर दबाव बना दिया है।
पश्चिम एशिया में गहराता युद्ध का संकट
कीमतों में इस उछाल के पीछे सबसे बड़ा कारण भू-राजनीतिक तनाव है। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या के बाद से क्षेत्र में मिसाइल हमलों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। इजरायल द्वारा तेहरान और बेरूत में नए हमलों के दावों और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान ने बाजार में चिंता बढ़ा दी है, जिसमें उन्होंने कहा कि यह युद्ध चार से पांच हफ्तों या उससे ज्यादा समय तक चल सकता है।
महंगाई बढ़ने का डर और फेडरल रिजर्व की नजर
निवेशकों को डर है कि युद्ध लंबा खिंचने से ऊर्जा (कच्चा तेल) की कीमतों में आग लग सकती है, जिससे वैश्विक स्तर पर महंगाई बढ़ेगी। ऐसी स्थिति में अमेरिकी फेडरल रिजर्व को ब्याज दरें ऊंची रखने या और बढ़ाने पर मजबूर होना पड़ सकता है। बाजार इस समय महंगाई और मंदी के दोहरे खतरों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है।
निवेशकों के लिए विशेषज्ञों की सलाह और सपोर्ट लेवल
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि लंबी अवधि में सोने-चांदी का रुझान (Trend) मजबूत है, लेकिन वर्तमान अस्थिरता को देखते हुए नई पोजीशन लेने में सावधानी बरतनी चाहिए। एक्सपर्ट्स के अनुसार:
सोना (Gold): सपोर्ट स्तर 1,59,100-1,57,700 रुपये और रेजिस्टेंस 1,63,500-1,65,800 रुपये है।
चांदी (Silver): सपोर्ट स्तर 2,57,700-2,51,500 रुपये और रेजिस्टेंस 2,71,000-2,78,800 रुपये बताया गया है।
फिलहाल निवेशकों को बाजार में स्थिरता आने का इंतजार करने की सलाह दी गई है।

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