
देश की आजादी के महानायक नेताजी सुभाष चंद्र बोस से जुड़ी एक बेहद अनमोल और ऐतिहासिक धरोहर के रहस्यमयी तरीके से गायब होने की खबर सामने आ रही है। नेताजी के परपोते चंद्र कुमार बोस ने सोशल मीडिया पर दावा किया है कि दिल्ली के लाल किले स्थित नेताजी संग्रहालय (क्रांति मंदिर) से नेताजी की वह टोपी गायब है, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वयं देश को समर्पित किया था। इस खुलासे के बाद हड़कंप मच गया है और चंद्र कुमार बोस ने सीधे प्रधानमंत्री से मदद की गुहार लगाई है।
प्रधानमंत्री को सौंपी गई थी अनमोल धरोहर
चंद्र कुमार बोस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर एक विस्तृत पोस्ट लिखकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 23 जनवरी 2019 का वह वाकया याद दिलाया। उन्होंने लिखा, “प्रधानमंत्री जी, आपको याद होगा कि मैंने, मेरे परिवार के सदस्यों और ‘द ओपन प्लेटफॉर्म फॉर नेताजी’ (OPN) के साथियों ने मिलकर नेताजी की टोपी आपको सौंपी थी। आपने इसे नेताजी जयंती (देशभक्त दिवस) के अवसर पर लाल किले के संग्रहालय में बड़े गर्व के साथ प्रदर्शित किया था।”
कैसे हुआ इस ‘चोरी’ या ‘लापरवाही’ का खुलासा?
इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब ‘द ओपन प्लेटफॉर्म फॉर नेताजी’ के सदस्य और एडवोकेट नवीन बामेल ने हाल ही में लाल किले स्थित इस संग्रहालय का दौरा किया। वहां पहुंचने पर उन्हें वह टोपी अपनी जगह पर नहीं मिली। चंद्र कुमार बोस के मुताबिक, जब इस बारे में वहां मौजूद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के अधिकारियों और कर्मचारियों से पूछताछ की गई, तो किसी के पास भी संतोषजनक जवाब नहीं था। एएसआई में किसी को भी यह जानकारी नहीं है कि वह ऐतिहासिक टोपी वर्तमान में कहां रखी गई है।

“बेहद शर्मनाक स्थिति”: चंद्र कुमार बोस
अपने पोस्ट में चंद्र कुमार बोस ने इस स्थिति को बेहद शर्मनाक बताया है। उन्होंने कहा कि नेताजी भारत के सबसे महान नायकों में से एक हैं और उनके निजी सामान की सुरक्षा में इस तरह की चूक देश के इतिहास और विरासत का अपमान है। उन्होंने पीएम मोदी से अपील की है कि वे इस मामले का तत्काल संज्ञान लें और इसकी जांच कराएं कि आखिर वह टोपी संग्रहालय से कहां चली गई।
2019 में पीएम मोदी ने जताया था आभार
गौरतलब है कि साल 2019 में जब प्रधानमंत्री को यह टोपी भेंट की गई थी, तब उन्होंने भी बेहद भावुक पोस्ट साझा किया था। पीएम मोदी ने बोस परिवार का आभार व्यक्त करते हुए लिखा था कि नेताजी द्वारा पहनी गई इस टोपी को ‘क्रांति मंदिर’ की प्रदर्शनी दीर्घा में रखा गया है ताकि देश के युवा इससे प्रेरणा ले सकें। प्रधानमंत्री ने उस समय इसे राष्ट्र के लिए एक गौरवपूर्ण क्षण बताया था।
विरासत की सुरक्षा पर उठे सवाल
लाल किला जैसे सुरक्षित और महत्वपूर्ण स्थान से ऐसी ऐतिहासिक वस्तु का ‘गायब’ होना सुरक्षा व्यवस्था और रखरखाव पर बड़े सवाल खड़े करता है। अभी तक इस मामले पर संस्कृति मंत्रालय या एएसआई की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन नेताजी के समर्थकों और देशप्रेमियों में इस खबर को लेकर गहरा रोष है।

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