
भारत निर्वाचन आयोग ने रविवार को देश के चार राज्यों—पश्चिम बंगाल, असम, केरल, तमिलनाडु और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए विस्तृत कार्यक्रम की घोषणा कर दी है। मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार ने एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि इन राज्यों की कुल 824 विधानसभा सीटों पर मतदान प्रक्रिया संपन्न कराई जाएगी। चुनाव की तारीखों के ऐलान के साथ ही इन राज्यों में तत्काल प्रभाव से ‘आदर्श आचार संहिता’ लागू हो गई है।

मतदान का पूरा शेड्यूल: कब और कहाँ पड़ेंगे वोट?
आयोग द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार, अलग-अलग राज्यों की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए चरणों का निर्धारण किया गया है:
असम, केरल और पुडुचेरी: इन तीनों राज्यों में 9 अप्रैल को एक ही चरण में मतदान होगा।
तमिलनाडु: यहाँ भी एक ही चरण में 23 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे।
पश्चिम बंगाल: सुरक्षा और संवेदनशीलता को देखते हुए बंगाल में दो चरणों में मतदान होगा। पहला चरण 23 अप्रैल और दूसरा चरण 29 अप्रैल को संपन्न होगा।
नतीजे: सभी पांचों क्षेत्रों के चुनावी नतीजे 4 मई, 2026 को एक साथ घोषित किए जाएंगे।

मतदाताओं की ताकत: कई देशों की आबादी से भी बड़ी संख्या
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने बताया कि इस बार कुल 17.4 करोड़ मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। यह संख्या इतनी बड़ी है कि ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, जर्मनी और कनाडा जैसे बड़े देशों की कुल आबादी के बराबर है। अकेले पश्चिम बंगाल में 6.44 करोड़ और असम में 2.5 करोड़ मतदाता हैं। आयोग ने विशेष रूप से युवाओं और पहली बार वोट देने वालों से अपील की है कि वे ‘चुनाव का पर्व, देश का गर्व’ का हिस्सा बनें।
सुरक्षा और इंतजाम: 8.50 लाख जवान रहेंगे तैनात
निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने के लिए आयोग ने अब तक की सबसे बड़ी सुरक्षा योजना तैयार की है:
सुरक्षा बल: मतदान को शांतिपूर्ण बनाने के लिए करीब 8.50 लाख सुरक्षाकर्मी तैनात किए जाएंगे।
चुनाव कर्मी: पूरी प्रक्रिया को संपन्न कराने के लिए 25 लाख चुनाव अधिकारी और कर्मचारी फील्ड में रहेंगे।
मतदान केंद्र: कुल 2.19 लाख मतदान केंद्र बनाए गए हैं।
पिंक बूथ: महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए कई स्थानों पर ‘पिंक बूथ’ बनाए जाएंगे, जिनका संचालन पूरी तरह महिला कर्मियों के हाथों में होगा।
स्वच्छ मतदाता सूची और पारदर्शिता
सीईसी ने जोर देकर कहा कि “स्वच्छ मतदाता सूची लोकतंत्र की आत्मा है।” इसके लिए एक विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान चलाया गया ताकि कोई भी योग्य मतदाता छूट न जाए। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि मतदान केंद्रों के भीतर मोबाइल फोन पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। पारदर्शिता बनाए रखने के लिए मतदान के तुरंत बाद मतदान प्रतिशत के आंकड़े सार्वजनिक किए जाएंगे।
प्रवर्तन एजेंसियों, जिला निर्वाचन अधिकारियों और पुलिस महानिदेशकों के साथ विस्तृत चर्चा के बाद आयोग ने यह सुनिश्चित किया है कि धनबल और बाहुबल का प्रयोग चुनावी प्रक्रिया में न हो सके।

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