
भारतीय चुनाव आयोग ने रविवार को केरल विधानसभा चुनाव 2026 के कार्यक्रमों की घोषणा कर दी है। राज्य की सभी 140 विधानसभा सीटों पर 9 अप्रैल 2026 को मतदान होगा। चुनाव की तारीखों के ऐलान के साथ ही राज्य के तीनों प्रमुख राजनीतिक गठबंधनों—एलडीएफ (LDF), यूडीएफ (UDF) और एनडीए (NDA)—ने अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। हालांकि, शुरुआती तैयारियों के मामले में सत्ताधारी वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) अपने प्रतिद्वंद्वियों से काफी आगे नजर आ रहा है।
एलडीएफ (LDF): उम्मीदवारों के चयन में दिखाई तत्परता
मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के नेतृत्व वाला 10 दलों का गठबंधन ‘एलडीएफ’ इस बार भी अपनी संगठनात्मक मजबूती का परिचय दे रहा है। गठबंधन के मुख्य घटक दलों, माकपा (CPI-M) और भाकपा (CPI) ने आंतरिक बैठकों के बाद अपने उम्मीदवारों के नामों पर लगभग सहमति बना ली है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि छोटे सहयोगी दलों के साथ भी चर्चा अंतिम चरण में है और अगले 48 घंटों के भीतर उम्मीदवारों की पहली आधिकारिक सूची जारी की जा सकती है। एलडीएफ का लक्ष्य विकास और कल्याणकारी योजनाओं के दम पर सत्ता बरकरार रखना है।

यूडीएफ (UDF): सीट बंटवारे और अंतर्कलह की चुनौती
विपक्षी खेमे यानी यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) में स्थिति थोड़ी जटिल नजर आ रही है। आठ दलों वाले इस गठबंधन का नेतृत्व कर रही कांग्रेस अभी भी अपने सहयोगियों के साथ सीटों के गणित को सुलझाने में जुटी है। केरल की राजनीति में यूडीएफ के लिए सीट बंटवारा हमेशा से एक संवेदनशील मुद्दा रहा है।
इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) और केरल कांग्रेस (जोसेफ) जैसे बड़े सहयोगी दल अधिक सीटों की मांग कर रहे हैं। सामान्यतः कांग्रेस राज्य की करीब 90 सीटों पर चुनाव लड़ती है, जबकि बाकी सीटें सहयोगियों के लिए छोड़ी जाती हैं। इस बार आरएसपी (RSP), सीएमपी (CMP) और मणि सी. कप्पेन की पार्टी के साथ तालमेल बिठाना कांग्रेस नेतृत्व के लिए एक बड़ी परीक्षा साबित हो रहा है।
एनडीए (NDA): भाजपा के हाथों में कमान
भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले एनडीए को सीट बंटवारे में अधिक कठिनाई होने के आसार नहीं हैं। गठबंधन में भाजपा सबसे बड़ा दल है और अधिकांश सीटों पर उम्मीदवार उतारने का फैसला पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व ही करेगा। एनडीए के पास भारत धर्म जन सेना (BDJS) और साबू एम. जैकब की पार्टी ‘ट्वेंटी20’ जैसे सहयोगी हैं। विशेष रूप से एर्नाकुलम जिले और तटीय क्षेत्रों में एनडीए अपनी पैठ मजबूत करने की कोशिश कर रहा है ताकि 2021 की हार का बदला लिया जा सके।
2021 के चुनावी नतीजों पर एक नजर
पिछले विधानसभा चुनाव (2021) के आंकड़े बताते हैं कि एलडीएफ ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी:
एलडीएफ (LDF): 99 सीटें (45.43% वोट शेयर)
यूडीएफ (UDF): 41 सीटें (39.47% वोट शेयर)
एनडीए (NDA): 00 सीटें (12.41% वोट शेयर)
2021 में भाजपा अपनी एकमात्र सीट (नेमम) भी गंवा बैठी थी, जिसे वापस पाना इस बार उसके लिए साख का सवाल है। वहीं, कांग्रेस के लिए यह चुनाव अस्तित्व की लड़ाई जैसा है, क्योंकि लगातार तीसरी बार हारना गठबंधन के भविष्य पर सवालिया निशान लगा सकता है।
आगे की राह: शुरुआती बढ़त का लाभ
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जो गठबंधन अपने उम्मीदवारों की घोषणा पहले करता है, उसे प्रचार के शुरुआती दौर में मनोवैज्ञानिक बढ़त मिलती है। एलडीएफ इस रणनीति पर काम कर चुका है, जबकि यूडीएफ को अपने अंतर्विरोधों को जल्द सुलझाना होगा। 9 अप्रैल को होने वाले मतदान के लिए अब नामांकन की प्रक्रिया शुरू होगी, जिससे राज्य में चुनावी सरगर्मी और बढ़ेगी।

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