
दिल्ली की पूर्ववर्ती आबकारी नीति (शराब घोटाला) से जुड़े मामले में कानूनी दांव-पेच एक बार फिर शीर्ष अदालत की दहलीज पर पहुंच गए हैं। आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर दिल्ली हाईकोर्ट की उस बेंच को बदलने की मांग की है, जो वर्तमान में सीबीआई की अपील पर सुनवाई कर रही है।
जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की बेंच पर आपत्ति
अरविंद केजरीवाल ने अपनी याचिका में दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की अध्यक्षता वाली बेंच के समक्ष निष्पक्ष सुनवाई को लेकर आशंका जताई है। केजरीवाल का तर्क है कि मौजूदा बेंच के रहते मामले की पारदर्शी और निष्पक्ष सुनवाई संभव नहीं हो पाएगी। गौरतलब है कि इससे पहले केजरीवाल ने इसी मांग को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय को भी पत्र लिखा था, जिसे मुख्य न्यायाधीश ने खारिज कर दिया था। अब सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप की उम्मीद में सोमवार को इस मामले पर जल्द सुनवाई की मांग की जा सकती है।
निचली अदालत के फैसले को सीबीआई की चुनौती
पूरा विवाद ट्रायल कोर्ट के उस ऐतिहासिक फैसले से शुरू हुआ, जिसमें अरविंद केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और अन्य 21 आरोपियों को सभी आरोपों से बरी कर दिया गया था। सीबीआई ने इस फैसले को ‘त्रुटिपूर्ण’ बताते हुए हाईकोर्ट में चुनौती दी है। जांच एजेंसी का दावा है कि बिना पूर्ण मुकदमे (Trial) के ही आरोपियों को बरी कर दिया गया, जबकि आबकारी नीति में कथित तौर पर निजी कंपनियों को लाभ पहुंचाने और रिश्वत लेने के पुख्ता सबूत मौजूद हैं। हाल ही में जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की बेंच ने इस अपील पर सभी आरोपियों को नोटिस जारी किया था।

9 मार्च के आदेश पर केजरीवाल की नाराजगी
केजरीवाल ने सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली हाईकोर्ट के 9 मार्च के उस आदेश को भी चुनौती दी है, जिसमें अदालत ने सीबीआई के जांच अधिकारी (IO) के खिलाफ निचली अदालत की टिप्पणियों पर रोक लगा दी थी। केजरीवाल पक्ष का आरोप है कि बेंच ने उनका पक्ष सुने बिना ही एकतरफा फैसला सुनाते हुए निचली अदालत की टिप्पणियों को हटा दिया, जो कानूनी प्रक्रिया के सिद्धांतों के विपरीत है।
ईडी (ED) की एंट्री और नई याचिका
कानूनी मोर्चे पर केवल सीबीआई ही नहीं, बल्कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी सक्रिय हो गया है। ईडी ने हाईकोर्ट में एक अलग याचिका दायर कर ट्रायल कोर्ट के फैसले से अपने खिलाफ की गई टिप्पणियों को हटाने की मांग की है। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) एसवी राजू ने कोर्ट में तर्क दिया कि जब निचली अदालत ने फैसला सुनाया, तब ईडी उस मामले में औपचारिक पक्षकार नहीं थी और उसे अपनी बात रखने का मौका नहीं दिया गया। ईडी का कहना है कि ये टिप्पणियां मनी लॉन्ड्रिंग (PMLA) के तहत चल रही उनकी समानांतर जांच को प्रभावित कर सकती हैं।
हाईकोर्ट का रुख और आगे की राह
दिल्ली हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि ईडी की शिकायतों और सीबीआई की मुख्य अपील पर एक साथ विचार किया जाएगा, क्योंकि ट्रायल कोर्ट के संपूर्ण फैसले को ही चुनौती दी गई है। सोमवार को होने वाली सुनवाई बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि एक तरफ सुप्रीम कोर्ट में केजरीवाल की याचिका पर नजर रहेगी, वहीं दूसरी तरफ हाईकोर्ट में सीबीआई की मुख्य अपील पर बहस शुरू हो सकती है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस मामले का परिणाम दिल्ली की आगामी राजनीति और आम आदमी पार्टी के भविष्य के लिए निर्णायक साबित होगा। जांच एजेंसियों का जोर यह साबित करने पर है कि नीतिगत बदलावों के पीछे बड़ी साजिश थी, जबकि ‘आप’ इसे राजनीतिक प्रतिशोध का हिस्सा बता रही है।

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