
भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने रविवार को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के कार्यक्रमों की घोषणा कर दी है। राज्य की सभी विधानसभा सीटों के लिए मतदान दो चरणों—23 अप्रैल और 29 अप्रैल—को संपन्न होगा। चुनाव की घोषणा के तुरंत बाद सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने आक्रामक रुख अपनाते हुए इस बार 250 से अधिक सीटें जीतने का दावा किया है।
ममता बनर्जी की वापसी का भरोसा और नंदीग्राम का जिक्र
चुनाव अधिसूचना जारी होने के बाद टीएमसी प्रवक्ता कुणाल घोष ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि राज्य की जनता मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के विकास कार्यों पर मुहर लगाएगी। घोष ने विश्वास जताया कि इस बार तृणमूल नंदीग्राम जैसी प्रतिष्ठा वाली सीट पर भी जीत दर्ज करेगी। उन्होंने कहा, “भाजपा केवल भ्रम फैलाने का काम करती है। बंगाल की जनता ममता बनर्जी को 250 से अधिक विधायकों के समर्थन के साथ फिर से सत्ता की कुर्सी पर बैठाएगी।”
चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर तीखा हमला
कुणाल घोष ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग को पूरी तरह निष्पक्ष रहना चाहिए, लेकिन ऐसा होता दिख नहीं रहा है। घोष ने कहा, “चाहे चुनाव एक चरण में हो या दो, इससे तृणमूल की संभावनाओं पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। बंगाल की जनता उन लोगों के खिलाफ वोट करेगी जो विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के नाम पर आम लोगों को परेशान कर रहे हैं।”
उन्होंने आगे कहा कि यह चुनाव केंद्र सरकार की ‘बदले की राजनीति’, बंगाल को केंद्रीय कोष से वंचित रखने, बंगाली भाषा के अपमान और राज्य की अस्मिता को ठेस पहुँचाने वालों के खिलाफ एक जनमत संग्रह होगा।

42 लाख मतदाताओं का भविष्य अधर में
इस चुनाव की घोषणा के बीच एक बड़ी चिंता 42 लाख से अधिक उन मतदाताओं को लेकर है, जिन्हें “तार्किक विसंगति” (Logical Discrepancy) श्रेणी में रखा गया है। इन मतदाताओं का भाग्य फिलहाल न्यायिक निर्णय पर निर्भर है। टीएमसी ने इस मुद्दे पर चिंता जताते हुए कहा कि एक भी वैध मतदाता को मतदान के अधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।
चुनावी समीकरण और 2026 की चुनौती
पिछले विधानसभा चुनावों की तुलना में इस बार कम चरणों (दो चरणों) में चुनाव होना सत्ताधारी दल के लिए एक रणनीतिक बदलाव माना जा रहा है। भाजपा जहां पिछली बार की हार का बदला लेने की तैयारी में है, वहीं टीएमसी अपनी संगठनात्मक मजबूती और बंगाल की ‘बेटी’ के कार्ड के साथ मैदान में है। 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को होने वाले मतदान के बाद यह साफ होगा कि बंगाल का सिंहासन किसके पास जाएगा।

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