
पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव की तारीखों के एलान के साथ ही सियासी पारा अपने चरम पर पहुँच गया है। चुनाव आयोग के द्वारा राज्य के डीजीपी और कोलकाता के पुलिस कमिश्नर सहित कई शीर्ष अधिकारियों के तबादले के फैसले के बाद नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने आयोग के इस कदम का स्वागत करते हुए एक कदम और आगे बढ़कर राज्य के सभी ‘थानेदारों’ को बदलने की पुरजोर मांग की है।
पुलिस और प्रशासन को ‘न्यूट्रल’ बनाने की दरकार
सुवेंदु अधिकारी ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए सबसे पहले पुलिस और प्रशासन को ‘न्यूट्रल’ करना अनिवार्य है। उन्होंने तर्क दिया कि महज शीर्ष अधिकारियों के बदलने से काम नहीं चलेगा, क्योंकि जमीनी स्तर पर चुनाव प्रभावित करने में थानेदारों की भूमिका सबसे अहम होती है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग को पिछले चुनावों के कड़वे अनुभवों से सीख लेते हुए इस बार पूरी सख्ती बरतनी चाहिए ताकि बंगाल में शांतिपूर्ण मतदान हो सके।
ममता बनर्जी पर साधा निशाना
टीएमसी प्रमुख और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के हालिया बयानों पर हमला बोलते हुए सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि वे केवल ‘ड्रामा’ कर रही हैं। उन्होंने भाजपा उम्मीदवारों के एलान पर स्पष्ट किया कि नामांकन प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही पार्टी अपने सभी प्रत्याशियों के नामों की घोषणा कर देगी और सारी प्रक्रिया को समय रहते पूरा कर लिया जाएगा। अधिकारी के अनुसार, भाजपा इस बार चुनाव में ममता सरकार को करारी शिकस्त देने के लिए पूरी तरह तैयार है।

चुनाव आयोग का कड़ा रुख
चुनाव आयोग ने महज अधिकारियों को हटाने तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि आयोग ने राज्य सरकार से उन पुलिस अधिकारियों की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है, जिनका तबादला 28 फरवरी (अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन) के बाद किया गया है। आयोग ने उन अधिकारियों का भी विवरण तलब किया है जिनके क्षेत्रों में 2021 विधानसभा और 2024 लोकसभा चुनाव के दौरान हिंसा की घटनाएं हुई थीं। यह आयोग की निष्पक्षता सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
दो चरणों में मतदान का फैसला
उल्लेखनीय है कि इस बार पश्चिम बंगाल में पिछले चुनावों के विपरीत मात्र दो चरणों में मतदान कराए जा रहे हैं। पहले चरण में 23 अप्रैल को 152 सीटों पर, जबकि दूसरे चरण में 29 अप्रैल को 142 सीटों पर जनता अपने मताधिकार का प्रयोग करेगी। पिछले चुनावों में यह प्रक्रिया 7 से 8 चरणों में पूरी हुई थी, जिसे इस बार काफी संक्षिप्त किया गया है। यह निर्णय राज्य में चुनावी हिंसा को रोकने और सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद रखने के उद्देश्य से लिया गया है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यह संक्षिप्त चुनावी प्रक्रिया भाजपा और टीएमसी के बीच सीधे मुकाबले को और भी दिलचस्प बना देगी।

गांव से लेकर देश की राजनीतिक खबरों को हम अलग तरीके से पेश करते हैं। इसमें छोटी बड़ी जानकारी के साथ साथ नेतागिरि के कई स्तर कवर करने की कोशिश की जा रही है। प्रधान से लेकर प्रधानमंत्री तक की राजनीतिक खबरें पेश करने की एक अलग तरह की कोशिश है।



