
ओडिशा के उच्च शिक्षा संस्थानों में एक बार फिर लोकतांत्रिक प्रक्रिया बहाल होने की उम्मीद जग गई है। राज्य की भाजपा सरकार कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में छात्रसंघ चुनाव फिर से शुरू करने पर गंभीरता से और सकारात्मक रूप से विचार कर रही है। विधानसभा में एक महत्वपूर्ण जानकारी साझा करते हुए उच्च शिक्षा मंत्री सूर्यवंशी सूरज ने स्पष्ट किया कि सरकार इन चुनावों को बंद करने के पक्ष में नहीं है, बल्कि इनके सफल और शांतिपूर्ण आयोजन की रूपरेखा तैयार की जा रही है।
विधानसभा में मंत्री का सकारात्मक रुख
शुक्रवार को सदन की कार्यवाही के दौरान उच्च शिक्षा मंत्री सूर्यवंशी सूरज ने कहा कि छात्रसंघ चुनाव कराना सरकार के विचाराधीन विषयों में प्रमुखता से शामिल है। उन्होंने जोर देकर कहा कि राज्य सरकार इस मुद्दे पर “सकारात्मक सोच” रखती है। मंत्री के अनुसार, वर्तमान में चुनाव कराने की व्यवहारिकता और इसकी रूपरेखा को लेकर विभिन्न स्तरों पर विस्तृत चर्चा जारी है। सरकार का उद्देश्य एक ऐसी प्रणाली विकसित करना है जिससे बिना किसी बाधा या हिंसा के चुनाव संपन्न कराए जा सकें।
छात्रों के नेतृत्व विकास का बड़ा मंच
ओडिशा में छात्रसंघ चुनावों को केवल राजनीतिक गतिविधि के रूप में नहीं, बल्कि भविष्य के नेतृत्व के विकास और लोकतांत्रिक भागीदारी के एक सशक्त मंच के रूप में देखा जाता है। पिछले कई वर्षों से इन चुनावों के न होने के कारण छात्र संगठनों और शैक्षणिक संस्थानों के बीच एक संवादहीनता की स्थिति बनी हुई थी। मंत्री के इस ताजा बयान से राज्य भर के छात्र नेताओं और युवाओं में भारी उत्साह देखा जा रहा है, क्योंकि इससे कॉलेजों में फिर से संगठित छात्र प्रतिनिधित्व की संभावना प्रबल हो गई है।

2017 के बाद से क्यों थमा था चुनावी पहिया?
उल्लेखनीय है कि ओडिशा के शैक्षणिक संस्थानों में वर्ष 2017 के बाद से छात्रसंघ चुनाव आयोजित नहीं किए जा सके हैं। इसके पीछे कई प्राकृतिक और प्रशासनिक कारण रहे हैं। वर्ष 2018 में विनाशकारी चक्रवात ‘तितली’ के कारण चुनावों को टालना पड़ा था। वहीं, 2019 में तत्कालीन बीजद (BJD) सरकार ने कानून-व्यवस्था और शांति बनाए रखने का हवाला देते हुए चुनाव नहीं कराने का निर्णय लिया था। इसके बाद 2020 और 2021 के दौरान संपूर्ण विश्व सहित ओडिशा भी कोविड-19 महामारी और लॉकडाउन की चपेट में रहा, जिससे शैक्षणिक गतिविधियाँ और चुनाव पूरी तरह ठप रहे।
भाजपा सरकार का निरंतर प्रयास
उच्च शिक्षा मंत्री सूर्यवंशी सूरज इस मुद्दे पर शुरू से ही मुखर रहे हैं। इससे पहले मई 2025 और फिर सितंबर 2025 में भी उन्होंने दोहराया था कि भाजपा के नेतृत्व वाली वर्तमान सरकार छात्रसंघ चुनाव कराने के प्रति प्रतिबद्ध है। सरकार का मानना है कि सभी संबंधित पक्षों, जिनमें कॉलेज प्रशासन और छात्र संगठन शामिल हैं, की राय लेकर ही कोई अंतिम निर्णय लिया जाएगा। हालांकि अभी किसी निश्चित तारीख की घोषणा नहीं हुई है, लेकिन माना जा रहा है कि विचार-विमर्श की प्रक्रिया अपने अंतिम चरण में है।
सरकार की इस पहल का मुख्य उद्देश्य छात्र राजनीति में अनुशासन और पारदर्शिता लाना है। मंत्री के बयानों से संकेत मिलते हैं कि सरकार जल्द ही चुनावों की तारीखों और नई गाइडलाइन्स का एलान कर सकती है। यदि ऐसा होता है, तो यह ओडिशा की उच्च शिक्षा प्रणाली में लोकतांत्रिक मूल्यों को पुनः जीवित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम साबित होगा।

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