
महाराष्ट्र की हाई-प्रोफाइल बारामती विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव को लेकर एक ऐतिहासिक फैसला सामने आया है। राज्य की राजनीति में मचे भारी घमासान के बीच कांग्रेस ने अपने कदम पीछे खींच लिए हैं। महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने आधिकारिक घोषणा की है कि पार्टी बारामती उपचुनाव से अपना उम्मीदवार वापस ले रही है। इस निर्णय के साथ ही उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार की निर्विरोध जीत का मार्ग पूरी तरह प्रशस्त हो गया है।
कांग्रेस ने क्यों लिया अपना नाम वापस?
कांग्रेस ने इस सीट पर आकाश मोरे को अपना आधिकारिक उम्मीदवार बनाया था, जो सुनेत्रा पवार को कड़ी चुनौती देने के लिए तैयार थे। हालांकि, नामांकन वापसी के अंतिम समय में पार्टी ने अपनी रणनीति बदल दी। हर्षवर्धन सपकाल ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से लेकर राज्य के कई दिग्गज नेताओं ने उनसे संपर्क कर इस चुनाव को निर्विरोध कराने का अनुरोध किया था। लोकतांत्रिक मर्यादा और क्षेत्र की विशेष परिस्थितियों को देखते हुए कांग्रेस हाईकमान ने जनभावनाओं के सम्मान में यह बड़ा फैसला लिया है।
अजित पवार की विरासत को सम्मान
यह उपचुनाव पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार के असामयिक निधन के कारण हो रहा है। इसी साल एक दुखद विमान दुर्घटना में उनके निधन के बाद बारामती की यह सीट रिक्त हुई थी। महाराष्ट्र के राजनीतिक हलकों में यह आम राय थी कि अजित पवार जैसे कद्दावर नेता की विरासत का सम्मान करते हुए उनके परिवार के विरुद्ध चुनाव नहीं लड़ा जाना चाहिए। यही कारण था कि सत्ता पक्ष के साथ-साथ विपक्ष के कई नेता भी इस सीट पर बिना किसी मुकाबले के सुनेत्रा पवार को चुनना चाहते थे।
दिग्गजों की अपील का दिखा बड़ा असर
इस निर्णय के पीछे राज्य के शीर्ष नेताओं की सक्रियता सबसे प्रमुख रही। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्वयं हर्षवर्धन सपकाल को फोन कर सहयोग मांगा था। वहीं, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) के प्रमुख शरद पवार ने कांग्रेस आलाकमान से संवाद स्थापित किया था। इतना ही नहीं, लोकसभा सांसद सुप्रिया सुले ने भी कांग्रेस से उम्मीदवार वापस लेने का आग्रह किया था। स्थानीय स्तर पर भी एनसीपी (एसपी) नेता रोहित पवार ने सपकाल से मुलाकात कर चुनाव को निर्विरोध बनाने पर जोर दिया, जिससे कांग्रेस पर नैतिक दबाव बढ़ गया।

सीएम फडणवीस की सीधी पहल
राज्य की राजनीति में शायद ही ऐसा पहले कभी देखा गया हो, जब मुख्यमंत्री ने खुद विपक्षी दल के प्रदेश अध्यक्ष को फोन कर उम्मीदवार हटाने का अनुरोध किया हो। सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल से सीधे संपर्क साधा। फडणवीस ने कांग्रेस से अपील की है कि वे अपनी पार्टी के उम्मीदवार का नाम वापस ले लें, ताकि अजित पवार की पत्नी और एनसीपी (अजित गुट) की प्रत्याशी सुनेत्रा पवार का निर्वाचन निर्विरोध संपन्न हो सके।
शरद पवार और मल्लिकार्जुन खड़गे के बीच चर्चा
दूसरी ओर, एनसीपी (एसपी) प्रमुख शरद पवार ने भी इस मामले में राष्ट्रीय स्तर पर मोर्चा संभाला है। उन्होंने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से फोन पर विस्तार से चर्चा की। शरद पवार ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस एक राष्ट्रीय दल है और निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र है, लेकिन एक वरिष्ठ और अनुभवी नेता (अजित पवार) के निधन के कारण उपजी इस स्थिति में यह चुनाव निर्विरोध होना ही एक सच्ची श्रद्धांजलि होगी। पवार का यह रुख दर्शाता है कि वे भी बारामती की पारिवारिक सीट पर किसी भी तरह के टकराव के पक्ष में नहीं हैं।
अजित पवार की विरासत और सम्मान का सवाल
यह उपचुनाव महज एक राजनैतिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार की विरासत से जुड़ा भावनात्मक मुद्दा बन गया है। महायुति (गठबंधन) के नेताओं का मानना है कि अजित पवार के कद और प्रदेश के विकास में उनके योगदान को देखते हुए उनके परिवार के खिलाफ उम्मीदवार खड़ा करना उचित नहीं होगा। इसी सिलसिले में सुनेत्रा पवार और एनसीपी के अन्य नेताओं ने हाल ही में सीएम फडणवीस से मुलाकात भी की थी, जहाँ मुख्यमंत्री ने उन्हें पूर्ण समर्थन का भरोसा दिया था।
जांच की मांग पर अड़ी थी कांग्रेस
उल्लेखनीय है कि शुरुआत में कांग्रेस का रुख काफी कड़ा था। पार्टी की मांग थी कि अजित पवार की विमान दुर्घटना की गहन जांच के लिए एफआईआर दर्ज की जाए और मामले की उच्च स्तरीय जांच हो। इसी विरोध और मांग को देखते हुए कांग्रेस ने आकाश मोरे को मैदान में उतारने का साहस दिखाया था। लेकिन, बदले हुए राजनीतिक घटनाक्रम और परिवार की भावनात्मक अपीलों के बाद कांग्रेस ने जांच की मांग को जारी रखते हुए चुनावी मैदान छोड़ने का निर्णय लिया।
अब बारामती में नहीं होगा मतदान
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, बारामती में 23 अप्रैल को मतदान होना था। लेकिन अब जबकि मुख्य प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस ने अपना नाम वापस ले लिया है, तो तकनीकी प्रक्रियाओं के बाद सुनेत्रा पवार को निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया जाएगा। महाराष्ट्र की राजनीति में यह एक दुर्लभ क्षण है जहाँ धुर विरोधी दल एक शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना जताते हुए एकमत नजर आए। इस फैसले ने न केवल बारामती बल्कि पूरे महाराष्ट्र को यह संदेश दिया है कि राजनीति से ऊपर भी कुछ व्यक्तिगत और सामाजिक मूल्य जीवित हैं।

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