
केरल विधानसभा चुनाव के लिए जारी मतदान के बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद शशि थरूर ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन पर कड़ा प्रहार किया है। तिरुवनंतपुरम में अपना वोट डालने के बाद थरूर ने दावा किया कि केरल की राजनीति में एनडीए की कोई विश्वसनीयता नहीं है और उन्होंने इसे ‘जीरो-सीट वाली पार्टी’ करार दिया। थरूर के इस बयान ने राज्य के त्रिकोणीय मुकाबले में राजनीतिक तपिश बढ़ा दी है।
NDA की मौजूदगी पर थरूर का बड़ा दावा
वोट डालने के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए शशि थरूर ने कहा कि एनडीए केरल में एक भी सीट जीतने की स्थिति में नहीं दिख रहा है। उन्होंने कहा, “एनडीए की केरल में कोई साख नहीं है। सरकार बनाने के मुद्दे पर जनता उन पर भरोसा नहीं करती। राज्य की 140 विधानसभा सीटों में से मुश्किल से दो सीटें ऐसी हो सकती हैं, जहां उन्हें एक मजबूत दावेदार के रूप में देखा जा सके, बाकी जगह उनका अस्तित्व न के बराबर है।”
यूडीएफ की संभावनाओं पर जताया भरोसा
कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) की जीत को लेकर थरूर काफी आश्वस्त नजर आए। उन्होंने 2011 के चुनावी नतीजों का जिक्र करते हुए कहा, “2011 में जब हमें सरकार बनाने का मौका मिला था, तब बहुमत बहुत कम था। लेकिन इस बार मुझे राज्य भर से जो संकेत मिल रहे हैं, उससे बेहतर नतीजों की उम्मीद है। हमें एक मजबूत आधार की जरूरत है ताकि सरकार राज्य में वास्तविक और बड़ा बदलाव ला सके।”
त्रिकोणीय मुकाबले और चुनावी दौरों का अनुभव
पूरे राज्य का दौरा करने के अपने अनुभव साझा करते हुए थरूर ने कहा कि उन्होंने जमीनी स्तर पर एनडीए की कोई लहर नहीं देखी है। उन्होंने स्वीकार किया कि राज्य में यूडीएफ, एलडीएफ और एनडीए के बीच तीन-तरफा मुकाबला है, लेकिन साथ ही जोड़ा कि एनडीए के पास कहीं भी जीत का कोई वास्तविक मौका नहीं है। थरूर के अनुसार, केरल की जनता विकास और विश्वसनीयता को चुन रही है, जिसमें एनडीए पिछड़ चुका है।

मतदान प्रतिशत और लोकतांत्रिक भागीदारी
शुरुआती वोटिंग ट्रेंड्स को लेकर थरूर ने संतोष व्यक्त किया। उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए एक स्वस्थ संकेत बताया। थरूर ने कहा, “आज अपने बूथ पर भारी संख्या में लोगों को वोट डालते देख मुझे खुशी हुई। यह दर्शाता है कि केरल के मतदाता जागरूक हैं और वे अपना फैसला केवल राजनीतिक कार्यकर्ताओं पर नहीं छोड़ रहे हैं। जनता का बड़ी संख्या में बाहर आना यह बताता है कि वे बदलाव के लिए तैयार हैं।”
महिला आरक्षण बिल पर कांग्रेस का रुख
बातचीत के दौरान शशि थरूर ने महिला आरक्षण बिल पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने भाजपा सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि महिला आरक्षण की पहल कांग्रेस और सोनिया गांधी ने यूपीए शासन के दौरान शुरू की थी। उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार इस बिल में क्या बदलाव लाना चाहती है, क्योंकि अभी तक बिल का प्रारूप स्पष्ट नहीं है। उन्होंने दोहराया कि कांग्रेस महिला सशक्तिकरण के पक्ष में है, लेकिन क्रियान्वयन के तरीके पर पारदर्शिता जरूरी है।
केरल की राजनीति में शशि थरूर का यह बयान ऐसे समय आया है जब राज्य की जनता अगले पांच साल के लिए अपनी सरकार चुन रही है। जहां भाजपा राज्य में अपनी जड़ें जमाने की कोशिश कर रही है, वहीं थरूर के दावों ने एक बार फिर केरल के चुनावी रण को ‘एलडीएफ बनाम यूडीएफ’ की पारंपरिक लड़ाई की ओर मोड़ दिया है। अब देखना होगा कि जनता के मन में क्या है और परिणाम थरूर के दावों पर कितनी मुहर लगाते हैं।

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