
देश की राजधानी स्थित ‘भारत मंडपम’ में आयोजित तीन दिवसीय ‘एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ का भव्य समापन एक ऐतिहासिक उपलब्धि के साथ हुआ। इस शिखर सम्मेलन का सबसे महत्वपूर्ण परिणाम ‘एआई इम्पैक्ट पर नई दिल्ली घोषणापत्र’ (New Delhi Declaration on AI Impact) को अपनाना रहा। इस वैश्विक दस्तावेज को दुनिया के 88 देशों और प्रमुख अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने अपना पूर्ण समर्थन दिया है, जो भविष्य की तकनीक यानी कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के सुरक्षित और न्यायसंगत उपयोग पर एक व्यापक वैश्विक सहमति को दर्शाता है।
‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ का मूल मंत्र
नई दिल्ली घोषणापत्र की सबसे बड़ी विशेषता इसका मानवीय दृष्टिकोण है। यह घोषणापत्र भारतीय दर्शन के ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ (सभी का कल्याण, सभी का सुख) के सिद्धांत से प्रेरित है। इस पर हस्ताक्षर करने वाले देशों ने यह स्वीकार किया है कि एआई के लाभ केवल विकसित देशों या चुनिंदा कॉर्पोरेट घरानों तक सीमित नहीं रहने चाहिए, बल्कि इसका लाभ मानवता के हर वर्ग, विशेषकर विकासशील देशों तक समान रूप से साझा किया जाना चाहिए।
घोषणापत्र के 7 प्रमुख स्तंभ
वैश्विक एआई सहयोग को मजबूती देने के लिए इस घोषणापत्र को सात विशेष स्तंभों पर आधारित किया गया है:
एआई संसाधनों का लोकतंत्रीकरण: तकनीक तक सबकी पहुंच सुनिश्चित करना।
आर्थिक विकास और सामाजिक हित: एआई को जीडीपी और लोक कल्याण का माध्यम बनाना।
सुरक्षित और विश्वसनीय एआई: डेटा सुरक्षा और नैतिक एआई प्रणालियों का विकास।
विज्ञान के लिए एआई: वैज्ञानिक अनुसंधान और खोजों की गति बढ़ाना।
सामाजिक सशक्तिकरण: हाशिए पर मौजूद समुदायों के लिए डिजिटल सुलभता।
मानव पूंजी विकास: एआई के दौर में कौशल विकास और शिक्षा पर जोर।
नवाचारी एआई प्रणालियां: लचीली, कुशल और भविष्य के अनुकूल प्रणालियों का निर्माण।
वैश्विक सहयोग की नई पहल
इस समिट के दौरान भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए कई स्वैच्छिक और सहयोगात्मक पहलों की घोषणा की गई। इसमें ‘एआई के लोकतांत्रिक प्रसार के लिए चार्टर’ और ‘ग्लोबल एआई प्रभाव कॉमन्स’ जैसे मंच शामिल हैं। साथ ही, ‘विज्ञान संस्थानों के लिए एआई का अंतर्राष्ट्रीय नेटवर्क’ बनाने का निर्णय लिया गया है, जो शोधकर्ताओं को एक साझा मंच प्रदान करेगा। कार्यबल को भविष्य के लिए तैयार करने हेतु ‘एआई वर्कफोर्स डेवलपमेंट प्लेबुक’ और पुनर्कौशलीकरण (Reskilling) सिद्धांतों पर भी सहमति बनी है।

राष्ट्रीय संप्रभुता और साझा प्राथमिकताएं
शिखर सम्मेलन के दौरान इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि एआई को आगे बढ़ाते समय प्रत्येक राष्ट्र की संप्रभुता का सम्मान किया जाना चाहिए। प्रतिभागियों ने एआई शासन (AI Governance) में साझा वैश्विक प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने और स्वैच्छिक, गैर-बाध्यकारी ढांचों के माध्यम से आपसी तालमेल बैठाने की प्रतिबद्धता जताई।
ऊर्जा-कुशल और ओपन-सोर्स इकोसिस्टम की आवश्यकता
घोषणापत्र में आर्थिक परिवर्तन को गति देने के लिए ओपन-सोर्स एआई इकोसिस्टम के महत्व को रेखांकित किया गया है। वर्तमान समय में पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए ऊर्जा-कुशल एआई बुनियादी ढांचे (Energy-efficient AI Infrastructure) के निर्माण पर भी चर्चा हुई। शासन और सार्वजनिक सेवा वितरण (Public Service Delivery) में एआई की भूमिका का विस्तार करने का लक्ष्य रखा गया है ताकि सरकारी सेवाएं आम आदमी तक सुगमता से पहुँच सकें।

इस समिट के समापन ने न केवल अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों को मजबूती दी है, बल्कि भारत को एआई के क्षेत्र में एक ‘सॉफ्ट पावर’ के रूप में स्थापित किया है। उम्मीद है कि ‘नई दिल्ली घोषणापत्र’ आने वाले दशकों में वैश्विक डिजिटल अर्थव्यवस्था का मार्गदर्शन करेगा।

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