
अमरावती: आंध्र प्रदेश को देश का प्रमुख औद्योगिक और तकनीकी केंद्र बनाने की दिशा में मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने एक महत्वाकांक्षी ब्लूप्रिंट पेश किया है। जिला कलेक्टर्स कॉन्फ्रेंस के दूसरे दिन मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार केवल पारंपरिक उद्योगों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि भविष्य की जरूरतों को देखते हुए हिंदूपुर में इलेक्ट्रॉनिक्स सिटी और अमरावती में क्रिएटिव सिटी का निर्माण करेगी।
इलेक्ट्रॉनिक्स और क्रिएटिव इकोनॉमी पर जोर
मुख्यमंत्री नायडू ने कहा कि हिंदूपुर की भौगोलिक स्थिति का लाभ उठाते हुए वहां एक अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स सिटी विकसित करने पर विचार किया जा रहा है। इसके साथ ही, राजधानी अमरावती को ‘क्रिएटिव इकोनॉमी’ का केंद्र बनाया जाएगा। यहाँ एआई (AI), कंटेंट क्रिएशन, फिल्म उद्योग और अन्य रचनात्मक उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए विशेष इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे युवाओं के लिए रोजगार के लाखों नए अवसर पैदा होंगे।
औद्योगिक क्लस्टर्स का विस्तार
राज्य के संतुलित विकास के लिए मुख्यमंत्री ने विशाखापत्तनम, अमरावती और तिरुपति को ‘इकोनॉमिक रीजन’ के रूप में विकसित करने की बात दोहराई। उन्होंने बताया कि कुरनूल जिले का ओर्वाकल पहले से ही एक इंडस्ट्रियल क्लस्टर बन चुका है और अब एयरपोर्ट की सुविधा मिलने से यह एक बड़े हब के रूप में उभरेगा। इसी तरह, कडप्पा जिले के कोप्पर्थी को भी एक प्रमुख औद्योगिक केंद्र के रूप में विकसित करने के निर्देश दिए गए हैं।

कलेक्टर्स के लिए ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ का नया मंत्र
मुख्यमंत्री ने जिला कलेक्टरों को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि वे केवल निवेशकों के आने का इंतजार न करें। उन्होंने कहा, “कलेक्टर्स और मंत्रियों को खुद आगे बढ़कर निवेशकों की पहचान करनी चाहिए और उनसे संपर्क साधना चाहिए।” सरकार अब जिलों की रैंकिंग ‘स्पीड ऑफ डूइंग बिजनेस’ के आधार पर करेगी। अगले सम्मेलन में इस बात की समीक्षा की जाएगी कि किस जिले ने कितना निवेश आकर्षित किया और कितनी नौकरियां पैदा कीं।
पर्यटन को मिला उद्योग का दर्जा: 50,000 होटल रूम का लक्ष्य
आंध्र प्रदेश की समृद्ध ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को भुनाने के लिए सरकार ने पर्यटन को ‘उद्योग’ का दर्जा दिया है। सीएम नायडू ने बताया कि राज्य का लक्ष्य पूरे आंध्र प्रदेश में 50,000 होटल रूम तैयार करना है। उन्होंने ‘होमस्टे’ संस्कृति को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया। वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए घरेलू पर्यटन में आने वाले उछाल को देखते हुए ऐतिहासिक स्मारकों और तीर्थस्थलों के कायाकल्प की योजना बनाई गई है।
स्थानीय ताकत के आधार पर विकास
नायडू ने कलेक्टर्स को सलाह दी कि हर जिले की अपनी एक विशिष्ट ताकत होती है। यदि किसी जिले में बड़े उद्योग नहीं लाए जा सकते, तो वहां कृषि, एमएसएमई (MSME), आईटी या पर्यटन को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने बुनियादी ढांचे जैसे पोर्ट, एयरपोर्ट और रेलवे परियोजनाओं को समय सीमा के भीतर पूरा करने की आवश्यकता पर भी विशेष बल दिया।

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