
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने मंगलवार को राज्य के भविष्य के राजनीतिक परिदृश्य को लेकर एक बेहद तीखी और चौंकाने वाली टिप्पणी की है। मुख्यमंत्री ने भविष्यवाणी की है कि 2031 के विधानसभा चुनावों तक असम में कांग्रेस पार्टी अपनी राजनीतिक अहमियत पूरी तरह खो देगी। सरमा के अनुसार, राज्य में विपक्ष का चेहरा बदलने वाला है और आने वाले समय में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सीधी टक्कर कांग्रेस से नहीं, बल्कि क्षेत्रीय दल ‘रायजोर दल’ से होगी।
कांग्रेस के जमीनी आधार में बड़ी सेंधमारी का दावा
मुख्यमंत्री सरमा ने अपने संबोधन में असम के बदलते राजनीतिक समीकरणों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस का पारंपरिक वोट बैंक और जमीनी आधार, विशेष रूप से मुस्लिम नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच, अब तेजी से खिसक रहा है। सरमा ने कहा, “अगले साल तक कांग्रेस के सभी मेहनती और सक्रिय मुस्लिम नेता रायजोर दल का दामन थाम लेंगे।”
उनके अनुसार, कांग्रेस का सांगठनिक ढांचा जमीनी स्तर पर इतना कमजोर हो चुका है कि वह अब वैकल्पिक राजनीतिक ताकतों के लिए जगह छोड़ रहा है। यह बदलाव राज्य की राजनीति में कांग्रेस के पतन और क्षेत्रीय ताकतों के उभार का संकेत है।
अखिल गोगोई बनाम भाजपा: नया चुनावी चक्र
रायजोर दल के अध्यक्ष अखिल गोगोई का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने भविष्य के समीकरणों की व्याख्या की। सरमा ने कहा कि यह सब इस बात पर निर्भर करेगा कि गोगोई स्वतंत्र राजनीति चुनते हैं या कांग्रेस के साथ गठबंधन करते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया, “अगर अखिल गोगोई कांग्रेस से हाथ मिलाते हैं, तो स्थिति अलग होगी। लेकिन अगर वे रायजोर दल को एक स्वतंत्र इकाई के रूप में रखते हैं, तो भाजपा की मुख्य लड़ाई उन्हीं से होगी।”
सरमा ने गोगोई की तुलना एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी से करते हुए कहा कि यदि गोगोई खुद को एक गंभीर और परिपक्व राजनेता के रूप में स्थापित करते हैं, तो वे मुस्लिम मतों को एकजुट कर एक बड़ी ताकत बन सकते हैं।

टिकट की राजनीति और पार्टी परिवर्तन
पार्टी बदलने की इच्छा रखने वाले विपक्षी नेताओं पर तंज कसते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा में शामिल होने के इच्छुक लोगों की कमी नहीं है, बशर्ते उन्हें चुनाव में टिकट का भरोसा मिले। हालांकि, उन्होंने साफ किया कि भाजपा उन लोगों में बिल्कुल भी दिलचस्पी नहीं रखती जो केवल पद या टिकट के लालच में आते हैं। फिर भी, उन्होंने स्वीकार किया कि चुनाव से ठीक पहले कई नेता पाला बदलकर भाजपा में शामिल होंगे।
कांग्रेस नेतृत्व और सांगठनिक गिरावट पर प्रहार
कांग्रेस सांसद रकीबुल हुसैन पर सीधा निशाना साधते हुए सरमा ने कहा कि जो नेता राजनीतिक विरासत के दम पर आगे बढ़ते हैं, वे अक्सर जमीनी हकीकत को नहीं समझ पाते। उन्होंने अपनी तुलना उन नेताओं से की जो खुद के संघर्ष से जमीन से उठकर आए हैं। सरमा ने कहा कि वे ऐसे जमीनी नेताओं का सम्मान करते हैं, भले ही वे भाजपा में न हों।
अंत में, उन्होंने भूपेन कुमार बोरा जैसे वरिष्ठ नेताओं के उदाहरण देते हुए कहा कि बड़े नेताओं के पार्टी छोड़ने से कांग्रेस के हिंदू कार्यकर्ताओं और छात्र विंग (NSUI) के सदस्यों के बीच गहरा मनोवैज्ञानिक और वैचारिक असर पड़ा है। मुख्यमंत्री के अनुसार, नेतृत्व का यह बिखराव असम में कांग्रेस की संगठनात्मक गिरावट को और तेज कर रहा है, जिससे 2031 तक पार्टी का प्रभाव लगभग शून्य हो जाएगा।

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