
पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर निर्वाचन आयोग और राज्य की तृणमूल कांग्रेस सरकार के बीच एक बार फिर तलवारें खिंच गई हैं। भारत निर्वाचन आयोग (ECI) द्वारा सोमवार को कार्य में लापरवाही के आरोप में सात सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों (AERO) को निलंबित किए जाने के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। मुख्यमंत्री ने साफ कर दिया है कि इन अधिकारियों की नौकरी नहीं जाएगी और राज्य सरकार उनके साथ खड़ी है।
“नहीं जाएगी नौकरी, अन्य विभागों में होगी नियुक्ति“
मंगलवार को मीडियाकर्मियों से बात करते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने निलंबित अधिकारियों को ढांढस बंधाया। उन्होंने कहा कि भले ही इन अधिकारियों को चुनाव संबंधी कार्यों से हटा दिया गया हो, लेकिन राज्य सरकार उन्हें वैकल्पिक क्षेत्रों या अन्य विभागों में नियुक्त करेगी। मुख्यमंत्री ने भरोसा जताया कि ये अधिकारी नए पदों पर बेहतर काम करेंगे।
ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग की कार्रवाई को “एकतरफा” करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि निलंबित किए गए सात एईआरओ को अपना पक्ष रखने का कोई मौका नहीं दिया गया। मुख्यमंत्री ने सीधे तौर पर चुनाव आयोग पर राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप करने और निर्वाचन अधिकारियों को डराने-धमकाने का आरोप लगाया। उन्होंने आयोग से अधिक लोकतांत्रिक और पारदर्शी तरीके से कार्य करने का अनुरोध किया।

सीईओ कार्यालय का रुख: नियमों के उल्लंघन पर हुई कार्रवाई
दूसरी ओर, पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के कार्यालय ने आयोग के फैसले का बचाव किया है। सूत्रों के अनुसार, इन सात अधिकारियों को किसी राजनीतिक द्वेष के कारण नहीं, बल्कि चुनाव आयोग द्वारा निर्धारित दिशानिर्देशों का स्पष्ट उल्लंघन करने के कारण निलंबित किया गया है।
सीईओ कार्यालय के एक वरिष्ठ सूत्र ने बताया, “निलंबन के लिए पर्याप्त और ठोस आधार थे। इन अधिकारियों को एसआईआर प्रक्रिया के दौरान बार-बार चेतावनी दी गई थी कि वे निर्धारित नियमों का पालन करें, लेकिन उन्होंने चेतावनियों को अनसुना कर मनमाने ढंग से काम जारी रखा। कानूनी प्रावधानों के तहत कार्य में लापरवाही बरतने पर ही यह अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है।” रिपोर्ट के अनुसार, पर्यवेक्षकों और सूक्ष्म पर्यवेक्षकों ने भी इन अधिकारियों के कामकाज पर प्रतिकूल टिप्पणी की थी।
AI के इस्तेमाल और मतदाता सूची पर गंभीर आरोप
विवाद केवल अधिकारियों के निलंबन तक सीमित नहीं रहा; मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर तकनीक के गलत इस्तेमाल का भी संगीन आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि आयोग कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का उपयोग करके मतदाता सूची से वास्तविक और वैध मतदाताओं के नाम हटा रहा है।
मुख्यमंत्री ने किसी का नाम लिए बिना अप्रत्यक्ष रूप से आयोग की महानिदेशक (सूचना प्रौद्योगिकी) सीमा खन्ना पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के प्रभाव में नियुक्त एक महिला अधिकारी एआई तकनीक के जरिए वोटर लिस्ट के साथ छेड़छाड़ कर रही हैं। ममता बनर्जी ने यह भी कहा कि इस प्रक्रिया में आयोग सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की भी अनदेखी कर रहा है।
बढ़ता राजनीतिक तनाव
पश्चिम बंगाल में चुनाव से पहले मतदाता सूची को लेकर होने वाले विवाद नए नहीं हैं, लेकिन इस बार एआई के इस्तेमाल और अधिकारियों के सामूहिक निलंबन ने इस मुद्दे को और गरमा दिया है। मुख्यमंत्री का यह बयान कि वे अधिकारियों को संरक्षण देंगी, सीधे तौर पर चुनाव आयोग की शक्ति को चुनौती देने के रूप में देखा जा रहा है।
आने वाले दिनों में यह विवाद और गहरा सकता है, क्योंकि एक तरफ आयोग निष्पक्ष चुनाव के लिए सख्त नियमों का हवाला दे रहा है, वहीं दूसरी तरफ सत्ताधारी दल इसे संघीय ढांचे पर हमला और मतदाताओं को प्रभावित करने की साजिश बता रहा है। फिलहाल, इन सात अधिकारियों का भविष्य अब राज्य सरकार के नए नियुक्ति आदेशों पर टिका है।

गांव से लेकर देश की राजनीतिक खबरों को हम अलग तरीके से पेश करते हैं। इसमें छोटी बड़ी जानकारी के साथ साथ नेतागिरि के कई स्तर कवर करने की कोशिश की जा रही है। प्रधान से लेकर प्रधानमंत्री तक की राजनीतिक खबरें पेश करने की एक अलग तरह की कोशिश है।



