
बिहार में आगामी विधानसभा चुनावों के लिए महागठबंधन के घटक दल जल्द ही सीट बंटवारे को अंतिम रूप देने वाले हैं। कांग्रेस ने कहा है कि इस सप्ताह के अंत तक इस मामले में तस्वीर साफ हो जाएगी। इसी बीच, बिहार चुनाव के लिए कांग्रेस की स्क्रीनिंग समिति की पहली अनौपचारिक बैठक हुई है, जिसमें पार्टी ने करीब 60 सीटों पर शुरुआती चर्चा की है। यह बैठक संकेत देती है कि महागठबंधन अपनी चुनावी रणनीति को अंतिम रूप देने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
15 सितंबर तक स्थिति साफ होने की उम्मीद
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और बिहार के प्रभारी कृष्णा अल्लावरु ने पार्टी मुख्यालय में मीडिया से बात करते हुए बताया कि महागठबंधन के घटक दलों के बीच सीट बंटवारे को लेकर बातचीत अंतिम दौर में है। उन्होंने कहा, “15 सितंबर तक स्थिति साफ हो जाएगी।” अल्लावरु ने यह भी बताया कि गठबंधन में कई अन्य पार्टियों को शामिल करने पर भी चर्चा चल रही है, जिससे सीटों का गणित और भी जटिल हो सकता है।
उन्होंने यह स्पष्ट किया कि इस बारे में कोई भी निर्णय राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव करेंगे। अल्लावरु के बयान से साफ है कि महागठबंधन नेतृत्व के मुद्दे पर एकजुट है और जल्द ही इस पर कोई ठोस घोषणा करेगा।
लचीले रुख के संकेत, सीटें घट सकती हैं
साल 2020 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 70 सीटों पर चुनाव लड़ा था, लेकिन इस बार महागठबंधन में कई नई पार्टियों के शामिल होने की संभावना है। इसी को देखते हुए कांग्रेस ने सीट बंटवारे को लेकर लचीला रुख अपनाने के संकेत दिए हैं। कृष्णा अल्लावरु ने कहा कि महागठबंधन एकजुट है और टिकट बंटवारे को लेकर कोई विवाद नहीं है। उन्होंने कहा कि सभी दल एक साथ बैठकर सीटों का बंटवारा कर लेंगे।
पार्टी की ओर से यह भी संकेत मिले हैं कि इस बार कांग्रेस की सीटों की संख्या घट सकती है। हालांकि, पार्टी राजद से कुछ सीटों की अदला-बदली की भी तैयारी कर रही है ताकि मजबूत सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे जा सकें।
मजबूत-कमजोर सीटों का संतुलन जरूरी
प्रदेश प्रभारी अल्लावरु ने सीट बंटवारे की रणनीति पर भी बात की। उन्होंने कहा कि उनकी कोशिश है कि महागठबंधन के सभी सहयोगी दलों के बीच मजबूत और कमजोर सीटों के बंटवारे का एक उचित संतुलन होना चाहिए। इससे यह सुनिश्चित होगा कि सभी दल अपनी-अपनी ताकत के हिसाब से चुनाव लड़ सकें।
उन्होंने यह भी बताया कि प्रदेश चुनाव समिति अगले सप्ताह की शुरुआत तक उम्मीदवारों का एक पैनल तैयार कर लेगी। इसके बाद 19 सितंबर को केंद्रीय स्क्रीनिंग समिति की बैठक हो सकती है, जिसमें अंतिम उम्मीदवारों के नामों पर मुहर लगाई जाएगी।
संयुक्त घोषणा पत्र और प्रचार रणनीति
महागठबंधन ने यह भी तय किया है कि वह आगामी चुनावों के लिए एक संयुक्त घोषणा पत्र जारी करेगा। इससे गठबंधन के सभी दल एक ही एजेंडे पर काम करेंगे और मतदाताओं को एक स्पष्ट संदेश दे पाएंगे। इसके अलावा, एकजुटता पर जोर देते हुए घटक दल मिलकर प्रचार रणनीति को अंतिम रूप देंगे।
इसके साथ ही, कांग्रेस ने राज्य के सभी 38 जिलों में प्रदेश स्तर के कार्यक्रम आयोजित करने का फैसला किया है, जिससे पार्टी की जमीनी पकड़ मजबूत हो सके।
नए दलों को शामिल करने पर चर्चा
अल्लावरु ने पूर्व केंद्रीय मंत्री पशुपति कुमार पारस और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के महागठबंधन में शामिल होने को लेकर भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि दोनों दलों को गठबंधन में लाने पर चर्चा जारी है और वार्ता सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है।
इसके अलावा, एआईएमआईएम के महागठबंधन में शामिल होने के बारे में पूछे जाने पर अल्लावरु ने बताया कि असदुद्दीन ओवैसी ने राजद को इस संबंध में एक पत्र लिखा है। इन सभी घटनाक्रमों से साफ है कि बिहार में चुनावी समीकरण लगातार बदल रहे हैं और महागठबंधन एक मजबूत और व्यापक गठबंधन बनाने की कोशिश में जुटा है।

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