विधानसभा चुनाव में हार के बाद भी भाजपा ने नहीं लिया सबक, कर्नाटक में बीजेपी बंटी हुई है पार्टी


विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार और 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले पूरे दक्षिण भारत में अपना जनाधार खोने के बाद भी कर्नाटक भाजपा इकाई अभी भी एक बंटा हुआ घर है।

एकता और कैडर में एक साथ लड़ने की भावना को बढ़ावा देने के लिए पार्टी नेतृत्व संघर्ष कर रहा है। जिस भगवा पार्टी ने एक बार एक मजबूत ताकत के रूप में उभरने और दक्षिण भारत में पैठ बनाने के सभी संकेत दिए थे, वह बुरी तरह से पिछड़ती जा रही है।

कर्नाटक चुनाव के परिणाम घोषित हुए लगभग एक महीना हो चुका है लेकिन भाजपा अभी विधानसभा और परिषद में विपक्ष के नेता की नियुक्ति नहीं कर पाई है। पूर्व मुख्यमंत्री और बेंगलुरु उत्तर से भाजपा सांसद डीवी सदानंद गौड़ा और राष्ट्रीय महासचिव सीटी रवि के बयान पार्टी के लिए एक और झटका साबित हुए हैं।

सीटी रवि ने कहा कि भाजपा के भीतर समायोजन की राजनीति है और विधानसभा चुनावों में पार्टी इस कारण से हारी। उन्होंने कहा कि हमने अपनी गलतियों के कारण सत्ता गंवाई है। नेताओं ने समझौता किया है और इन्हीं चंद लोगों की वजह से पार्टी की सत्ता चली गई है। मैं नेताओं का नाम नहीं लूंगा, लेकिन समायोजन की राजनीति मौजूद है और इसके परिणामस्वरूप पार्टी की हार हुई।

पार्टी के सूत्रों ने कहा कि सीटी रवि की टिप्पणी पूर्व सीएम बीएस येदियुरप्पा और उनके बेटे बीवाई विजयेंद्र को निशाना बनाकर की गई थी। पूर्व सीएम डीवी सदानंद गौड़ा के बयानों ने पार्टी के कार्यकर्ताओं को और निराश कर दिया और दिखाया कि पार्टी के भीतर सब ठीक नहीं है। उन्होंने दावा किया कि 13 सांसद बदनाम होने को लेकर उनसे संपर्क कर चुके हैं और मामले पर पार्टी आलाकमान चुप है।

सदानंद गौड़ा ने कहा कि कुल 25 में से 13 सांसदों को बेकार बताकर बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। वरिष्ठ सांसदों के मनोबल को गिराने का सुनियोजित प्रयास किया गया है। उन्होंने मांग की कि राष्ट्रीय नेताओं को हस्तक्षेप करना चाहिए और इस स्तर पर भ्रम को दूर करना चाहिए।

लोकसभा चुनाव में अभी एक साल का समय है। ऐसे में सांसदों को निशाना बनाया जा रहा है और उन्हें बदनाम किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि मैं नहीं जानता कि इसके पीछे कौन है। अफवाहें फैलाई जा रही हैं कि 13 सांसदों ने अपने निर्वाचन क्षेत्रों में कोई विकास कार्य नहीं किया है। कुछ सांसद बीमार पड़ गए हैं और उन्हें टिकट नहीं दिया जाएगा। सदानंद गौड़ा ने हार पर आत्मनिरीक्षण करने की सलाह दी है।

भाजपा ने हाल ही में अपने विधायकों और चुनाव हारने वाले उम्मीदवारों की बैठक की थी। इन उम्मीदवारों ने पार्टी द्वारा उन्हें बहुत देर से टिकट आवंटित करने और राज्य के लोगों को गलत संकेत देने के फैसले पर सवाल उठाया। हालांकि, पार्टी ने निर्धारित कोर कमेटी की बैठक स्थगित कर दी है। कर्नाटक प्रभारी अरुण सिंह ने विभिन्न नेताओं की राय ली है और पार्टी आलाकमान की ओर देख रही है।

दूसरी ओर, कांग्रेस राज्य में अपना समर्थन मजबूत करने की दिशा में बड़े कदम उठा रही है। पार्टी ने कैबिनेट का पूरा कोटा भर दिया है और महत्वपूर्ण बेंगलुरु निकाय चुनाव और आगामी लोकसभा चुनाव की तैयारी शुरू कर दी है। कांग्रेस भाजपा और आरएसएस की विचारधारा को निशाना बना रही है और उस पर सवाल उठा रही है। आलाकमान सीएम सिद्दारमैया और डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार के बीच सामंजस्य सुनिश्चित कर रहा है। इन दोनों की जोड़ी बीजेपी के लिए खतरनाक नजर आ रही है।

भाजपा के सूत्रों ने कहा कि पार्टी यह समझने की कोशिश में कोई गंभीरता नहीं दिखा रही है कि कई मंत्रियों सहित 54 मौजूदा विधायक चुनाव क्यों हार गए। 72 नए चेहरों को टिकट जारी करने का प्रयोग औंधे मुंह गिरा है। चुनाव में 40 से अधिक उम्मीदवारों की जमानत जब्त हुई है। नेता वोट प्रतिशत की बात कर बहादुरी से मोर्चा खड़ा करने की कोशिश कर रहे हैं।


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