
तमिलनाडु में आगामी विधानसभा चुनाव 2026 भले ही एक साल दूर हों, लेकिन सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) ने अभी से अपनी तैयारी शुरू कर दी है। इसी रणनीतिक योजना के तहत मुख्यमंत्री और पार्टी अध्यक्ष एम.के. स्टालिन ने गुरुवार को जिला सचिवों की एक अहम बैठक की अध्यक्षता की। यह बैठक वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए आयोजित हुई, जिसमें चुनावी रणनीति, सदस्यता अभियान और जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत करने के मुद्दों पर चर्चा की गई।
सदस्यता अभियान की समीक्षा और लक्ष्य तय
डीएमके महासचिव दुरई मुरुगन द्वारा जारी बयान के अनुसार, यह बैठक पार्टी के “ओरानियिल तमिलनाडु” यानी “संगठित तमिलनाडु” नामक सदस्यता नामांकन अभियान के तहत बुलाई गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य था—सदस्यता अभियान की प्रगति का मूल्यांकन करना और उसे तेज करना।
स्टालिन ने जिला सचिवों को स्पष्ट निर्देश दिए कि हर बूथ स्तर पर नए सदस्यों को जोड़ना पार्टी की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बूथ में 30% मतदाताओं को डीएमके से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है और इसकी दैनिक रिपोर्टिंग भी अनिवार्य होगी।
संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की कोशिश
डीएमके का यह अभियान सिर्फ एक औपचारिक सदस्यता अभियान नहीं, बल्कि एक व्यापक चुनावी रणनीति का हिस्सा है। पार्टी चाहती है कि हर गांव, हर वार्ड, और हर शहर में उसकी सक्रिय मौजूदगी हो। बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं की संख्या बढ़ाकर डीएमके वोटरों से सीधा संपर्क स्थापित करना चाहती है, जिससे विपक्ष की पकड़ को कमजोर किया जा सके।
चुनावी रणनीति की शुरुआत, आने वाले हफ्तों में और सक्रियता
पार्टी सूत्रों का मानना है कि यह बैठक भविष्य में होने वाली उच्च स्तरीय चुनावी बैठकों की एक शुरुआत है। आने वाले महीनों में डीएमके अपने डिजिटल कैंपेन, स्थानीय कार्यकर्ताओं के प्रशिक्षण, और चुनावी मुद्दों के वर्गीकरण जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर भी रणनीति तैयार करेगी।
सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री स्टालिन जिला नेतृत्व को यह संकेत दे चुके हैं कि पार्टी को अगले चुनाव में आक्रामक और सशक्त अभियान की जरूरत होगी, क्योंकि 2026 का मुकाबला कड़ा और बहुपक्षीय हो सकता है।
राजनीतिक संकेत और संगठनात्मक ऊर्जा
यह बैठक न केवल संगठनात्मक दृष्टि से अहम थी, बल्कि यह एक राजनीतिक संकेत भी है कि डीएमके चुनाव को हल्के में नहीं ले रही। पार्टी जानती है कि राज्य की सत्ता बनाए रखने के लिए जमीनी मजबूती और कार्यकर्ताओं में जोश अत्यंत आवश्यक है। स्टालिन की अध्यक्षता में हुई यह बैठक दर्शाती है कि डीएमके अब अपने संगठनात्मक ढांचे को फिर से सक्रिय करने और मतदाता संपर्क अभियान को तेज़ करने के चरण में प्रवेश कर चुकी है।
तमिलनाडु में चुनावी बिगुल भले ही आधिकारिक रूप से न बजा हो, लेकिन डीएमके ने पहले ही रणभेरी फूंक दी है। मुख्यमंत्री स्टालिन की सक्रिय भागीदारी और संगठन को चुस्त-दुरुस्त करने की पहल बताती है कि पार्टी 2026 के चुनाव को एक निर्णायक जंग मान रही है—जिसमें जीत के लिए अब कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी।

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