
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा दिए गए “हिंदुस्तान में इलेक्शन चोरी” वाले बयान से देश की राजनीति में बहस छिड़ गई है। इसपर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस नेता टीएस सिंहदेव ने चुनाव आयोग को सीधे निशाने पर लिया और गंभीर आरोप लगाए।
संवैधानिक संस्था पर विश्वास का संकट
सिंहदेव ने मीडिया से बातचीत में कहा कि जनता ने चुनाव आयोग पर वर्षों तक भरोसा जताया है, लेकिन अब यह विश्वास कमजोर पड़ता जा रहा है। उन्होंने चुनाव आयोग की तुलना प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से की और कहा कि अब ये भी एक राजनीतिक दल की तरह काम करने लगा है। बताया कि- “चुनाव आयोग अब मैनिपुलेशन का हिस्सा बन सकता है, यह कोई सोच भी नहीं सकता था।”
महाराष्ट्र में संदिग्ध मतदान प्रक्रिया
सिंहदेव ने महाराष्ट्र विधानसभा का उदाहरण देते हुए मतदाता सूची में भारी गड़बड़ी के आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि पांच सालों में जोड़े जाने वाले वोट सिर्फ पांच महीने में जोड़ दिए गए। इसके अलावा, शाम 5 बजे के बाद 8% अतिरिक्त मतदान हुआ जो सामान्य मानकों से परे है। शिरडी विधानसभा क्षेत्र में एक घर में 8000 मतदाता नाम जोड़े जाने की बात भी सामने आई।
वीवी पैड बैटरी और हरियाणा चुनाव पर सवाल
हरियाणा के चुनाव में वीवी पैड मशीनों को लेकर सिंहदेव ने आश्चर्य जताया कि वोटिंग के बाद भी इनकी बैटरी 99% चार्ज रही। उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव आयोग ने साक्ष्य मांगे जाने पर नए नियम पारित कर दिए, जिसकी कोई सार्वजनिक जानकारी नहीं दी गई।
झारखंड और रोहिंग्या का मुद्दा
सिंहदेव ने झारखंड में रोहिंग्या नागरिकों के कथित बसाव पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि यदि बाहर से लोग आ रहे हैं, तो इसके लिए केंद्र सरकार जिम्मेदार है, लेकिन फिर सवाल उठता है कि वे कैसे बिना रोकटोक के देश में प्रवेश कर गए।
बिहार में एसआईआर को लेकर चिंता
बिहार में शुरू किए गए विशेष संशोधन रजिस्टर (SIR) को लेकर सिंहदेव ने चुनाव आयोग पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा को चुनाव जिताने की मंशा के तहत पुरानी मतदाता सूची को खत्म कर नई लिस्ट तैयार की जा रही है। एसआईआर प्रक्रिया में ऐसे प्रमाण पत्र मांगे जा रहे हैं जो आम जनता के लिए सहज उपलब्ध नहीं हैं—जैसे कि आधार और राशन कार्ड को अस्वीकार किया जा रहा है।
चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल
टीएस सिंहदेव के आरोप चुनाव आयोग की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर बड़ा सवाल खड़ा करते हैं। यदि इन दावों में तथ्य है, तो देश की लोकतांत्रिक संरचना के लिए यह एक चिंताजनक संकेत हो सकता है। ऐसे में जरूरी है कि आयोग इन आरोपों का स्पष्ट जवाब दे और जनता के विश्वास को फिर से बहाल करे।

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