
झारखंड की राजनीति को एक बड़ी क्षति पहुंची है। राज्य के वरिष्ठ कांग्रेस नेता, पूर्व सांसद और पूर्व मंत्री चंद्रशेखर दुबे, जिन्हें जनता ‘ददई दुबे’ के नाम से जानती थी, अब हमारे बीच नहीं रहे। उनके निधन से न केवल कांग्रेस पार्टी बल्कि पूरे झारखंड में शोक की लहर दौड़ गई है।
स्वास्थ्य मंत्री और कांग्रेस नेता डॉ. इरफान अंसारी ने गुरुवार को चंद्रशेखर दुबे के निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि उनका जाना उनके लिए व्यक्तिगत रूप से अपूरणीय क्षति है। उन्होंने कहा कि दुबे जी ने हमेशा दलितों, मजदूरों और कमजोर तबकों की आवाज को मजबूती से उठाया और उनके अधिकारों की लड़ाई लड़ी।
इरफान अंसारी ने अपने शोक संदेश में उन्हें अपने पिता फुरकान अंसारी के समान ही अभिभावक तुल्य बताया। उन्होंने कहा कि चंद्रशेखर दुबे उनके चुनाव अभियान के दौरान भी हमेशा साथ खड़े रहे और हर मुश्किल वक्त में उन्हें मार्गदर्शन देते थे। अंसारी ने कहा, “दुबे जी न सिर्फ मुझे बल्कि मेरे परिवार को अपने घर बुलाकर अपनेपन से भोजन कराते थे। उनकी यह सादगी और नेतृत्व दोनों ही हमेशा याद रहेगा।”
मंत्री ने एक संस्मरण साझा करते हुए कहा कि एक बार कुछ अधिकारियों ने मजदूरों के साथ दुर्व्यवहार किया था, तब सांसद रहते हुए दुबे जी मजदूरों के पक्ष में खड़े हो गए और डीसी ऑफिस ले जाकर अधिकारियों से माफी मंगवाई थी। अंसारी ने कहा, “ऐसे नेता विरले होते हैं जो जनता की आवाज बनकर उनका हक दिलाने के लिए किसी भी हद तक जाते हैं।”

गौरतलब है कि चंद्रशेखर दुबे पलामू के विश्रामपुर से छह बार विधायक और धनबाद से सांसद रह चुके थे। उन्होंने मुखिया से लेकर मंत्री पद तक का सफर अपनी जनप्रिय छवि और जमीनी संघर्ष से तय किया था। ग्रामीण विकास मंत्री और इंटक के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहते हुए उन्होंने श्रमिकों और दलित समाज के हितों की रक्षा के लिए कई ऐतिहासिक फैसले लिए।
इरफान अंसारी ने कहा कि दुबे जी का जाना कांग्रेस पार्टी और समाज के लिए बहुत बड़ी क्षति है, जिसकी भरपाई कभी नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि दुबे जी की विरासत को सहेज कर रखना और उनके दिखाए रास्ते पर चलना ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
पूर्व सांसद चंद्रशेखर दुबे का निधन 10 जुलाई को दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में 87 वर्ष की आयु में हुआ। वे लंबे समय से अस्वस्थ थे। गढ़वा जिले के चोका गांव के निवासी ‘ददई दुबे’ अपनी सादगी और संघर्षशील छवि के कारण आज भी लोगों के दिलों में बसे हुए हैं।

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