
असम की राजनीति में विधानसभा चुनावों से ठीक पहले एक बड़ी हलचल देखने को मिली है। बुधवार को पूर्व कद्दावर कांग्रेस नेता और पूर्व सांसद प्रद्युत बोरदोलोई ने औपचारिक रूप से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का दामन थाम लिया। इस मौके पर मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बोरदोलोई का गर्मजोशी से स्वागत किया और कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व पर निशाना साधते हुए कहा कि अब उस पुरानी पार्टी में ‘आत्मसम्मान’ रखने वाले व्यक्तियों के लिए कोई स्थान नहीं बचा है।
कांग्रेस में अपमान और ‘आत्मसम्मान’ का सवाल
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान प्रद्युत बोरदोलोई के भाजपा में शामिल होने को एक सामान्य घटनाक्रम नहीं, बल्कि कांग्रेस की कार्यप्रणाली पर एक बड़ा सवाल बताया। सीएम ने कहा, “मैं प्रद्युत जी का हृदय से स्वागत करता हूँ। आज की कांग्रेस में उन लोगों का दम घुट रहा है जो अपना स्वाभिमान बचाकर राजनीति करना चाहते हैं।” उन्होंने संकेत दिया कि बोरदोलोई जैसे वरिष्ठ नेता का जाना इस बात का प्रमाण है कि कांग्रेस अपने अनुभवी नेताओं को संभालने में विफल रही है।
अगले दो वर्षों के लिए बड़ी भविष्यवाणी
हिमंत बिस्वा सरमा यहीं नहीं रुके, उन्होंने भविष्य की राजनीति को लेकर एक बड़ी भविष्यवाणी भी कर डाली। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस से नेताओं के पलायन का यह सिलसिला थमेगा नहीं, बल्कि और तेज होगा। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट तौर पर नाम लेते हुए कहा कि अगले दो वर्षों के भीतर देबब्रता सैकिया और रिपुन बोरा जैसे दिग्गज नेता भी भाजपा का हिस्सा बन जाएंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि कांग्रेस के कई सक्षम और जमीनी नेता लगातार भाजपा के संपर्क में हैं और 2016 से शुरू हुई यह प्रक्रिया अब अपने चरम पर पहुंचने वाली है।

सत्ता का मोह नहीं, बलिदान का कदम
बोरदोलोई के भाजपा में शामिल होने के कारणों को स्पष्ट करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कदम किसी पद या मंत्रालय के लालच में नहीं उठाया गया है। सरमा ने कहा, “प्रद्युत बोरदोलोई यहाँ मंत्री बनने नहीं आए हैं। उन्होंने भाजपा में आने के लिए एक सांसद के रूप में अपना सम्मानित पद छोड़ा है, जो उनके त्याग को दर्शाता है।” उन्होंने आश्वासन दिया कि यदि भविष्य में बोरदोलोई चुनाव लड़ने की इच्छा जताते हैं, तो पार्टी उन्हें हर संभव सहयोग और समर्थन प्रदान करेगी।
प्रद्युत बोरदोलोई का छलका दर्द: ‘सहना पड़ा अपमान’
भाजपा की सदस्यता ग्रहण करने के बाद प्रद्युत बोरदोलोई ने भी अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि वे पार्टी के भीतर लगातार हो रहे अपमान से बेहद आहत थे। बोरदोलोई ने आरोप लगाया कि कांग्रेस की असम इकाई में वरिष्ठों की अनदेखी की जा रही है, जिसके चलते उनके पास इस्तीफा देने के अलावा और कोई विकल्प शेष नहीं बचा था। उन्होंने कहा कि वे भाजपा की विचारधारा और मुख्यमंत्री सरमा के विकास कार्यों से प्रभावित होकर एक नई पारी की शुरुआत कर रहे हैं।
असम चुनाव से पहले कांग्रेस को तगड़ा झटका
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रद्युत बोरदोलोई का भाजपा में जाना आगामी विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस के लिए एक अपूरणीय क्षति है। बोरदोलोई की छवि एक सुलझे हुए और अनुभवी नेता की रही है। उनके जाने से न केवल कांग्रेस का संगठन कमजोर होगा, बल्कि भाजपा को ऊपरी असम के क्षेत्रों में अपनी बढ़त मजबूत करने में मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री सरमा के आत्मविश्वास भरे बयानों ने विपक्षी खेमे में बेचैनी बढ़ा दी है।

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