
कर्नाटक की सिद्धारमैया सरकार ने सामाजिक कुरीतियों और ऑनर किलिंग जैसी जघन्य घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। बुधवार को विधानसभा में ‘इवा नम्मावा’ (Iva Namma) बिल पेश किया गया। इस विधेयक का प्राथमिक उद्देश्य अंतरजातीय (Inter-caste) और अंतर-सामुदायिक विवाह करने वाले जोड़ों को सुरक्षा प्रदान करना और उनके खिलाफ होने वाली हिंसा को रोकना है। यह बिल 12वीं सदी के महान समाज सुधारक बसवन्ना के ‘वचन’ से प्रेरित है, जिसका अर्थ समानता और भाईचारे को बढ़ावा देना है।

मान्या पाटिल हत्याकांड बना बिल का आधार
इस कानून की आवश्यकता तब महसूस की गई जब दिसंबर 2025 में हुबली में एक रूह कंपा देने वाली घटना सामने आई। लिंगायत समुदाय की मान्या पाटिल ने एक दलित युवक विवेकानंद से प्रेम विवाह किया था। गर्भवती होने के बावजूद, मान्या की उसके ही पिता और रिश्तेदारों ने बेरहमी से हत्या कर दी थी। इस घटना ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया था। सरकार ने इसी त्रासदी को संज्ञान में लेते हुए ‘इवा नम्मावा’ बिल का मसौदा तैयार किया ताकि भविष्य में किसी और ‘मान्या’ को अपनी पसंद का जीवनसाथी चुनने की सजा मौत के रूप में न मिले।
‘ऑनर क्राइम’ की नई और व्यापक परिभाषा
प्रस्तावित कानून में ‘ऑनर क्राइम’ को केवल हत्या तक सीमित नहीं रखा गया है। इसमें शारीरिक नुकसान पहुंचाना, जबरन शादी कराना, जबरन तलाक के लिए दबाव डालना और प्रेमी जोड़ों का सामाजिक बहिष्कार करना भी शामिल है। कानून के तहत इन अपराधों को संज्ञेय (Cognizable) और गैर-जमानती (Non-Bailable) श्रेणी में रखा गया है। सामान्य मामलों में कम से कम पांच साल की जेल और गंभीर मामलों में उम्रकैद तक की कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है।
सुरक्षा के लिए 24 घंटे हेल्पलाइन और सेफ हाउस
बिल में केवल सजा ही नहीं, बल्कि निवारक उपायों पर भी जोर दिया गया है। अपनी जान को खतरा महसूस करने वाले जोड़ों के लिए सरकार 24 घंटे चालू रहने वाली एक विशेष हेल्पलाइन शुरू करेगी। इसके अलावा, धमकियों का सामना कर रहे जोड़ों के लिए सुरक्षित आश्रय स्थल (Safe Houses) बनाए जाएंगे, जहां वे पुलिस सुरक्षा में रह सकेंगे। यह कदम उन वयस्कों के संवैधानिक अधिकार की रक्षा करेगा जो अपनी सहमति से शादी करना चाहते हैं।
हुबली घटना का वो काला अध्याय
दिसंबर 2025 की उस घटना का जिक्र बिल की चर्चा के दौरान बार-बार हुआ। मान्या और विवेकानंद ने जून 2025 में रजिस्ट्रार ऑफिस में शादी की थी। सुरक्षा के लिहाज से वे गांव छोड़कर चले गए थे, लेकिन गर्भवती होने पर इस उम्मीद में लौटे कि परिवार उन्हें अपना लेगा। पुलिस द्वारा दोनों परिवारों के बीच समझौता कराने के बावजूद, मान्या के परिजनों ने घर में घुसकर उसकी जान ले ली। यह बिल ऐसी प्रशासनिक खामियों को दूर करने और पुलिस की जवाबदेही तय करने का भी काम करेगा।
बसवन्ना के सिद्धांतों पर आधारित कानून
राज्य के आईटी, बीटी और ग्रामीण विकास मंत्री ने बिल पेश करते हुए कहा कि ‘इवा नम्मावा’ का अर्थ है “यह हमारा अपना है।” यह नाम भेदभाव को खारिज करता है। सरकार का मानना है कि यह कानून केवल दंड देने के लिए नहीं, बल्कि समाज में यह संदेश देने के लिए है कि प्रेम और विवाह व्यक्तिगत पसंद का मामला है, न कि किसी समुदाय की झूठी शान का। अब इस बिल पर सदन में विस्तृत चर्चा होगी, जिसके बाद इसे कानून का रूप दिया जाएगा।

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