
भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के वर्किंग प्रेसिडेंट के.टी. रामा राव (केटीआर) ने शुक्रवार को तेलंगाना म्युनिसिपल चुनावों के नतीजों पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इन परिणामों को बीआरएस में जनता के बढ़ते अटूट विश्वास और वर्तमान कांग्रेस सरकार के प्रति गहरी नाराजगी का प्रतीक बताया। केटीआर ने स्पष्ट किया कि ये नतीजे राज्य की भावी राजनीति की दिशा तय करेंगे।
सत्ता के दुरुपयोग के बावजूद बड़ी जीत
मीडिया से बातचीत के दौरान केटीआर ने सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि सरकार ने प्रशासनिक मशीनरी, पैसे और ताकत का जमकर गलत इस्तेमाल किया। मतदाताओं और उम्मीदवारों को डराने-धमकाने के बावजूद बीआरएस ने शहरी स्थानीय निकायों में एक मुख्य राजनीतिक शक्ति के रूप में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। उन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी पार्टी का साथ देने के लिए कार्यकर्ताओं और समर्थकों का आभार व्यक्त किया।
चुनावी आंकड़ों में बीआरएस का दबदबा
केटीआर ने बताया कि स्थानीय निकाय चुनाव आमतौर पर सत्ता पक्ष के पक्ष में होते हैं, लेकिन तेलंगाना की जनता ने इस परंपरा को तोड़कर अलग संदेश दिया है। उन्होंने दावा किया कि बीआरएस ने सीधे तौर पर 15 से अधिक नगर पालिकाओं में स्पष्ट जीत हासिल की है। इसके अलावा, 10 से 15 अन्य नगर पालिकाओं में बीआरएस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। कुल मिलाकर 116 नगर पालिकाओं के नतीजे पार्टी के लिए अत्यंत उत्साहजनक और राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हैं।

विगत चुनावों से तुलना और वर्तमान स्थिति
उन्होंने याद दिलाया कि 2020 के नगर निगम चुनावों में तत्कालीन टीआरएस (अब बीआरएस) ने 130 निकायों में से 122 पर कब्जा किया था। हालिया पंचायत चुनावों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि लगभग 40 प्रतिशत ग्राम पंचायतों और 4,000 से अधिक सरपंच पदों पर बीआरएस समर्थित उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की है। नगर निगम के इन ताजा नतीजों ने जमीनी स्तर पर पार्टी की स्थिति को और भी अधिक मजबूत कर दिया है।
खरीद-फरोख्त के आरोपों पर कड़ा रुख
केटीआर ने कांग्रेस पर चुनाव के बाद जीतने वाले सदस्यों को प्रलोभन देने और दबाव बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नतीजों को प्रभावित करने के लिए ‘डर्टी टैक्टिक्स’ अपना रही है। बीआरएस इन अनैतिक कोशिशों का डटकर मुकाबला करेगी और जरूरत पड़ने पर कानूनी रास्ता भी अपनाएगी।
धर्मनिरपेक्ष ताकतों के साथ गठबंधन की तैयारी
भविष्य की रणनीति पर चर्चा करते हुए केटीआर ने बताया कि सिंगरेनी कोयला खदानों के संचालन में गड़बड़ियों के खुलासे के बाद सीपीआई ने चेन्नूर और क्याथनपल्ली जैसे क्षेत्रों में बीआरएस के साथ हाथ मिलाया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बीआरएस, कांग्रेस और भाजपा को स्थानीय निकायों पर नियंत्रण करने से रोकने के लिए अन्य धर्मनिरपेक्ष ताकतों के साथ मिलकर काम करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

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