
बहुचर्चित नेशनल हेराल्ड से जुड़े धनशोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) मामले में कांग्रेस नेता सोनिया गांधी, राहुल गांधी और अन्य के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा दाखिल आरोपपत्र पर दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने सोमवार को सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है। विशेष जज विशाल गोगने की अदालत ने कहा कि ईडी के आरोपों का संज्ञान लिया जाना चाहिए या नहीं, इस पर 29 जुलाई को आदेश पारित किया जाएगा।
गौरतलब है कि प्रवर्तन निदेशालय ने इस मामले में सोनिया गांधी और राहुल गांधी के अलावा वरिष्ठ कांग्रेस नेता सुमन दुबे, सैम पित्रोदा, यंग इंडियन कंपनी, डाटेक्स मर्चेंडाइज और सुनील भंडारी को भी आरोपी बनाया है। ईडी का आरोप है कि इन सभी ने एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) की संपत्ति अवैध तरीके से हासिल करने के लिए आपराधिक साजिश रची थी। ईडी का दावा है कि एजेएल के शेयर कानून और नियमों को ताक पर रखकर यंग इंडियन कंपनी को हस्तांतरित किए गए, जिससे बड़ी मात्रा में संपत्ति का गैरकानूनी हस्तांतरण हुआ।
दानदाताओं से धोखाधड़ी का आरोप
ईडी ने अदालत में यह भी दलील दी कि कांग्रेस पार्टी को दान देने वालों के साथ धोखाधड़ी की गई है। जांच एजेंसी ने यह संकेत भी दिया कि यदि इस संबंध में पुख्ता सबूत मिलते हैं तो कांग्रेस पार्टी को भी इस केस में आरोपी बनाया जा सकता है। ईडी की दलील है कि जनता और दानदाताओं के विश्वास का दुरुपयोग करते हुए पार्टी फंड का गलत इस्तेमाल किया गया।
बचाव पक्ष ने आरोपों को बताया निराधार
वहीं दूसरी ओर, कांग्रेस नेताओं और अन्य प्रतिवादियों ने अदालत के समक्ष ईडी के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि यह मामला राजनीतिक द्वेष से प्रेरित है और इसमें किसी तरह की अवैध गतिविधि नहीं हुई है। बचाव पक्ष के वकीलों ने दलील दी कि यह पूरा मामला राजनीतिक बदले की भावना से उठाया गया है ताकि विपक्ष के बड़े नेताओं को कानूनी प्रक्रिया में उलझाकर दबाव बनाया जा सके।
अगली सुनवाई पर सबकी नजर
कोर्ट के इस फैसले पर अब सबकी नजरें टिकी हैं। 29 जुलाई को अदालत यह तय करेगी कि ईडी के आरोपों पर मुकदमा चलाने लायक प्रथम दृष्टया आधार बनता है या नहीं। यदि कोर्ट ईडी के आरोपपत्र पर संज्ञान ले लेती है तो इस मामले में सोनिया गांधी, राहुल गांधी समेत अन्य नेताओं की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। वहीं, कांग्रेस इसे राजनीतिक साजिश करार देते हुए पहले ही आरोपों को बेबुनियाद बता चुकी है।
इस हाई-प्रोफाइल केस को लेकर राजनीतिक गलियारों में भी चर्चाओं का बाजार गर्म है और सभी की निगाहें अब अदालत के अगले आदेश पर टिक गई हैं।

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