
संसद में विपक्षी दलों का जोरदार विरोध जारी है, लेकिन इसके बावजूद केंद्र सरकार अपने महत्वपूर्ण विधायी एजेंडे पर काम कर रही है। हाल ही में, राज्यसभा ने ‘खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2025’ को मंजूरी दी, जिसका उद्देश्य देश के खनन क्षेत्र में विनियमन और खनिज उत्पादन को बढ़ावा देना है। यह विधेयक पहले ही लोकसभा में पारित हो चुका था।
यह विधेयक उस समय पारित किया गया जब कई विपक्षी दलों के सदस्य मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एस.आई.आर.) के मुद्दे पर विरोध करते हुए सदन से वॉकआउट कर गए थे। खान और खनन मंत्री, जी. किशन रेड्डी ने बताया कि इस विधेयक के छह संशोधन खनन क्षेत्र के हित में हैं। उन्होंने लिथियम, कोबाल्ट, और दुर्लभ मृदा तत्वों जैसे महत्वपूर्ण खनिजों के महत्व पर जोर दिया, जिनकी मांग सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा जैसे क्षेत्रों में लगातार बढ़ रही है। मंत्री ने कहा कि सरकार ने 24 अति-महत्वपूर्ण खनिजों का शुल्क-मुक्त आयात करने का निर्णय लिया है, जिससे देश में खनिज उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा।
गुवाहाटी में नया आई.आई.एम.: शिक्षा के क्षेत्र में नई पहल
इसी बीच, लोकसभा में विपक्ष के हंगामे के बावजूद, भारतीय प्रबंध संस्थान (संशोधन) विधेयक, 2025 को भी मंजूरी मिल गई। इस विधेयक का उद्देश्य गुवाहाटी में एक नया भारतीय प्रबंध संस्थान (आई.आई.एम.) स्थापित करना है। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बताया कि केंद्र सरकार ने इस परियोजना के लिए 550 करोड़ रुपये का आर्थिक अनुदान दिया है, जबकि असम सरकार ने अन्य सभी आवश्यक सुविधाएं प्रदान करने का वादा किया है।
धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि यह विधेयक कानून बनने के बाद पूर्वोत्तर में शिलांग के बाद दूसरा आईआईएम स्थापित करेगा, जिससे इस क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण प्रबंधन शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा। यह कदम दर्शाता है कि सरकार विधायी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है, भले ही संसद में गतिरोध बना हुआ हो। इन विधेयकों का पारित होना सरकार की प्राथमिकता को दिखाता है, जो कि देश के खनन और शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को मजबूत करने पर केंद्रित है।

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