
बिहार में स्थानीय निकाय और जमीनी स्तर के शासन को लेकर नीतीश सरकार ने अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश ने शनिवार को आधिकारिक तौर पर घोषणा की कि राज्य में आगामी पंचायत चुनाव अपने पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार ही संपन्न होंगे। सरकार ने साफ किया है कि चुनाव प्रक्रिया में निरंतरता बनाए रखने के लिए परिसीमन की मौजूदा व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। यह निर्णय चुनावी तैयारियों में जुटे उम्मीदवारों और प्रशासनिक अधिकारियों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है।
प्रमुख और उप-प्रमुख पदों के लिए पुरानी प्रक्रिया रहेगी जारी
चुनाव की शुचिता और स्पष्टता पर जोर देते हुए मंत्री दीपक प्रकाश ने बताया कि प्रमुख और उप-प्रमुख जैसे महत्वपूर्ण पदों के लिए चुनाव प्रक्रिया वैसी ही रहेगी जैसी पिछले चुनावों में थी। इसमें किसी भी प्रकार का तकनीकी फेरबदल नहीं किया जाएगा। हालांकि, सबसे महत्वपूर्ण घोषणा 2026 के चुनावों को लेकर हुई है। मंत्री ने बताया कि आगामी पंचायत चुनावों के लिए एक नया आरक्षण रोस्टर तैयार किया जा रहा है। इसका उद्देश्य समाज के हर वर्ग को समान और उचित प्रतिनिधित्व देना है, ताकि ‘समावेशी सुशासन’ के संकल्प को पूरा किया जा सके।
रुके हुए विकास कार्यों को गति देने का निर्देश
गया जिले के दौरे के दौरान मंत्री ने टंकुप्पा ब्लॉक के बरसाउना गाँव का दौरा किया। यहाँ स्थानीय विरोध के कारण ‘पंचायत सरकार भवन’ का निर्माण कार्य लंबे समय से अटका हुआ था। मंत्री ने स्वयं निर्माण स्थल का निरीक्षण किया और भूमि संबंधी दस्तावेजों की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि सभी विवादों का निपटारा कर निर्माण कार्य तत्काल प्रभाव से शुरू किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि बुनियादी ढांचे के विकास में किसी भी प्रकार की देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
नेतृत्व पर बोले मंत्री: ‘नीतीश कुमार ही रहेंगे चेहरा’
गया के सर्किट हाउस में पत्रकारों से बात करते हुए दीपक प्रकाश ने राज्य की राजनीतिक स्थिति पर भी खुलकर चर्चा की। बिहार के अगले मुख्यमंत्री को लेकर चल रही अटकलों पर विराम लगाते हुए उन्होंने कहा कि राज्य की कमान नीतीश कुमार के हाथों में ही सुरक्षित है। पिछले दो दशकों में बिहार ने जो विकास देखा है, उसका पूरा श्रेय मुख्यमंत्री के सुशासन (Good Governance) को जाता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि गांधी मैदान में ईद समारोह के दौरान मुख्यमंत्री की व्यस्तता केवल सरकारी कामकाज तक सीमित थी और इसे किसी अन्य चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए।
राष्ट्रीय राजनीति और चुनावी हिंसा पर कटाक्ष
मंत्री ने पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल की स्थिति पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि बंगाल में चुनाव के दौरान होने वाली हिंसा एक पुरानी और गंभीर समस्या बन चुकी है। हालांकि, उन्होंने संकेत दिया कि बंगाल के मतदाता अब जागरूक हो चुके हैं और वे भविष्य में निश्चित रूप से एक सकारात्मक बदलाव का विकल्प चुनेंगे। बिहार के संदर्भ में उन्होंने दोहराया कि सरकार पंचायत चुनावों के माध्यम से लोकतंत्र की जड़ों को और मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।

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