
बिहार के प्रतिष्ठित पटना विश्वविद्यालय (PU) की छात्र राजनीति से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आ रही है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने आगामी छात्र संघ चुनाव (PUSU Election 2025-26) को तत्काल प्रभाव से स्थगित कर दिया है। यह मतदान आगामी 28 फरवरी को होना निर्धारित था, लेकिन कैंपस में हाल के दिनों में हुई अप्रिय घटनाओं और आचार संहिता के खुले उल्लंघन के बाद प्रशासन ने यह कठोर निर्णय लिया है।

क्यों लिया गया चुनाव स्थगित करने का फैसला?
विश्वविद्यालय द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, पिछले कुछ दिनों में परिसर के भीतर कई अमर्यादित और अप्रत्याशित घटनाएं घटी हैं। प्रशासन का मानना है कि वर्तमान माहौल शांतिपूर्ण और निष्पक्ष चुनाव के लिए अनुकूल नहीं है। मुख्य रूप से दो बड़ी घटनाओं ने इस निर्णय की पृष्ठभूमि तैयार की:
पटना वूमेंस कॉलेज में हंगामा: छात्रों के एक गुट द्वारा पटना वूमेंस कॉलेज परिसर में बिना किसी अनुमति के अनाधिकृत प्रवेश किया गया। वहां न केवल नारेबाजी की गई, बल्कि चुनाव आचार संहिता की धज्जियां उड़ाते हुए छपे हुए बैनर-पोस्टर और महंगी गाड़ियों का प्रदर्शन किया गया।
शिक्षकों के साथ अभद्रता: 21 जनवरी को पटना साइंस कॉलेज में एक कक्षा के भीतर घुसकर छात्रों द्वारा शिक्षकों और विश्वविद्यालय के वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ अमर्यादित व्यवहार किया गया। इस घटना ने विवि प्रशासन को सुरक्षा और अनुशासन के प्रति गंभीर कर दिया।

चुनाव आचार संहिता का खुलेआम उल्लंघन
पटना विश्वविद्यालय प्रशासन ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि उम्मीदवार लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों और आचार संहिता का पालन करने में विफल रहे। निर्धारित समय से पूर्व प्रचार शुरू करना, प्रचार में बेतहाशा धन खर्च करना और प्रिंटेड सामग्री का उपयोग करना इस बार के चुनाव में आम हो गया था। नियमों के अनुसार, छात्र संघ चुनाव में केवल हस्तनिर्मित पोस्टरों का उपयोग किया जा सकता है, लेकिन सड़कों और दीवारों पर बड़े-बड़े प्रिंटेड बैनर नजर आ रहे थे।
उम्मीदवारों और छात्र संगठनों में मची हलचल
चुनाव स्थगित होने की सूचना मिलते ही विभिन्न छात्र संगठनों और चुनावी मैदान में उतरे उम्मीदवारों के बीच हड़कंप मच गया है। कई प्रत्याशी पिछले कई हफ्तों से अपनी पूरी ताकत झोंक रहे थे। नामांकन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी और कैंपेन अपने चरम पर था। अब अचानक लगी रोक ने छात्रों के समीकरण बिगाड़ दिए हैं। हालांकि, प्रशासन के इस सख्त संदेश से यह स्पष्ट हो गया है कि अनुशासनहीनता को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
नामांकन और चुनावी समीकरणों पर एक नजर
इस बार छात्र संघ चुनाव के लिए भारी उत्साह देखा जा रहा था। प्रमुख पदों के लिए नामांकन के आंकड़े इस प्रकार थे:
अध्यक्ष पद: 16 उम्मीदवार
उपाध्यक्ष पद: 09 उम्मीदवार
महासचिव पद: 09 उम्मीदवार
संयुक्त सचिव: 08 उम्मीदवार
कोषाध्यक्ष: 09 उम्मीदवार
पार्षद (कैबिनेट सदस्य): 22 पदों के लिए कुल 54 नामांकन दाखिल किए गए थे।
एनएसयूआई (NSUI) समर्थकों पर लगे गंभीर आरोप
घटनाक्रम के दौरान यह बात प्रमुखता से सामने आई कि एनएसयूआई के समर्थकों ने जबरन पटना वूमेंस कॉलेज में प्रवेश किया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, समर्थक बैनरों के साथ नारेबाजी कर रहे थे, जिससे कॉलेज प्रशासन और छात्राओं के बीच असहज स्थिति पैदा हो गई। इसी विवाद के बाद मामले ने तूल पकड़ा और विश्वविद्यालय की अनुशासन समिति को हस्तक्षेप करना पड़ा।

अब कब होगा मतदान? संशय बरकरार
फिलहाल विश्वविद्यालय ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि मतदान की नई तारीख क्या होगी। ‘अगले आदेश तक’ लगाए गए इस स्थगन के बाद यह कयास लगाए जा रहे हैं कि जब तक परिसर में सुरक्षा व्यवस्था और अनुशासन बहाल नहीं हो जाता, तब तक चुनाव प्रक्रिया फिर से शुरू नहीं की जाएगी। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि वह केवल आदर्श माहौल में ही चुनाव संपन्न कराएगा।
शिक्षकों और प्रबुद्ध वर्ग का समर्थन
विश्वविद्यालय के शिक्षकों और पदाधिकारियों ने प्रशासन के इस निर्णय का स्वागत किया है। उनका कहना है कि छात्र राजनीति के नाम पर कैंपस में गुंडागर्दी और शिक्षकों के साथ बदतमीजी को बढ़ावा नहीं दिया जा सकता। यह फैसला आने वाले समय के लिए एक नजीर साबित होगा ताकि छात्र नेता नियमों के दायरे में रहकर राजनीति करें।

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