
पश्चिम एशिया में गहराते युद्ध के बादलों के बीच भारत ने एक बार फिर वैश्विक शांति दूत की भूमिका निभाई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले 24 घंटों के भीतर दुनिया के चार प्रमुख देशों के राष्ट्राध्यक्षों से फोन पर बात की। इस कूटनीतिक संवाद का केंद्र पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव, संप्रभुता का सम्मान और बातचीत के जरिए समाधान निकालना रहा। पीएम मोदी ने फ्रांस, ओमान, कुवैत और मलेशिया के नेताओं के साथ साझा हितों और वैश्विक स्थिरता पर विस्तृत चर्चा की।
मलेशिया: त्योहार की बधाई और कूटनीति पर जोर
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने मलेशियाई समकक्ष अनवर इब्राहिम से बातचीत के दौरान शांति व्यवस्था स्थापित करने के लिए कूटनीति को अनिवार्य बताया। पीएम ने सोशल मीडिया पर जानकारी साझा करते हुए कहा, “मैंने अपने मित्र अनवर इब्राहिम से बात की और उन्हें आगामी ‘हरि राया एदिलफित्री’ त्योहार की शुभकामनाएं दीं। हमने पश्चिम एशिया के हालातों पर गंभीर चिंता व्यक्त की और इस बात पर सहमति जताई कि केवल संवाद और डिप्लोमेसी के जरिए ही तनाव को कम किया जा सकता है।”
फ्रांस: मैक्रों के साथ शांति और स्थिरता पर विमर्श
यूरोपीय शक्ति फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ हुई बातचीत में पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि युद्ध किसी समस्या का समाधान नहीं है। उन्होंने कहा कि हालात को सामान्य करने के लिए कूटनीति के रास्ते पर लौटना बेहद जरूरी है। दोनों नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि भारत और फ्रांस वैश्विक शांति और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए अपना आपसी सहयोग निरंतर जारी रखेंगे।
ओमान: संप्रभुता का उल्लंघन और नागरिकों की सुरक्षा
ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक को ‘भाई’ कहकर संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने उन्हें ईद की अग्रिम बधाई दी। इस दौरान भारत ने ओमान की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के उल्लंघन की कड़े शब्दों में निंदा की। पीएम मोदी ने होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) में सुरक्षित और फ्री नेविगेशन का समर्थन किया। साथ ही, उन्होंने भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वापसी में ओमान द्वारा की गई मदद की सराहना भी की। दोनों नेता इस बात पर सहमत हुए कि ‘डी-एस्केलेशन’ यानी तनाव कम करना वर्तमान समय की सबसे बड़ी जरूरत है।
कुवैत: भारतीय समुदाय की सुरक्षा और हमलों की निंदा
विदेश मंत्रालय के अनुसार, पीएम मोदी ने कुवैत के क्राउन प्रिंस शेख सबाह से भी वार्ता की। प्रधानमंत्री ने कुवैत पर हुए हालिया हमलों की कड़ी निंदा करते हुए क्षेत्र में शांति बहाली की अपील की। वार्ता का एक मुख्य पहलू कुवैत में रहने वाले लाखों भारतीयों की सुरक्षा रहा। पीएम मोदी ने वहां रह रहे भारतीय समुदाय की देखभाल के लिए क्राउन प्रिंस का विशेष आभार व्यक्त किया।
भारत की तटस्थ और प्रभावी भूमिका
प्रधानमंत्री की यह त्वरित कूटनीतिक पहल दर्शाती है कि भारत वैश्विक संकटों में केवल मूकदर्शक नहीं है, बल्कि सक्रिय रूप से समाधान का हिस्सा बन रहा है। “संवाद और कूटनीति” के भारतीय मंत्र को अब दुनिया के अन्य प्रभावशाली देश भी पश्चिम एशिया संकट के स्थायी समाधान के रूप में देख रहे हैं।

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