
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने बुधवार को लोकसभा में जन विश्वास (संशोधन) विधेयक, 2025 पेश किया, जिसका उद्देश्य देश में विश्वास-आधारित शासन को मजबूत करना है। इस विधेयक को चयन समिति के पास भेजा गया है ताकि इस पर गहन विचार-विमर्श किया जा सके। यह विधेयक आम नागरिकों और व्यवसायों के लिए जीवन को सरल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
यह नया विधेयक जन विश्वास अधिनियम 2023 की अगली कड़ी है। 2023 के कानून में 42 केंद्रीय कानूनों के 183 प्रावधानों को आपराधिक श्रेणी से हटाया गया था। अब, 2025 का यह विधेयक सुधार की प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए 10 मंत्रालयों और विभागों से संबंधित 16 केंद्रीय कानूनों के तहत 288 प्रावधानों को गैर-आपराधिक बना रहा है।
विधेयक के प्रमुख प्रावधान और उनका प्रभाव
इस विधेयक के तहत कुल 355 प्रावधानों में संशोधन का प्रस्ताव है, जिससे जीवन और व्यापार करना दोनों आसान हो जाएंगे।
छोटे उल्लंघनों पर नरमी: 10 महत्वपूर्ण अधिनियमों के तहत पहली बार किए गए हल्के उल्लंघनों पर अब जेल की सजा की बजाय केवल चेतावनी या सलाह दी जाएगी। यह प्रावधान विशेष रूप से उन मामलों के लिए है जहाँ तकनीकी या मामूली गलतियाँ होती हैं।
जुर्माने का नया प्रावधान: तकनीकी, प्रक्रियागत या मामूली गलतियों पर अब केवल जुर्माना या चेतावनी दी जाएगी। इन जुर्मानों को तर्कसंगत और संतुलित बनाया गया है, और बार-बार उल्लंघन करने पर जुर्माने की राशि में धीरे-धीरे वृद्धि होगी।
न्यायपालिका पर बोझ कम करना: इस विधेयक में निर्धारित अधिकारी को प्रशासनिक रूप से जुर्माना लगाने का अधिकार दिया गया है, जिससे अदालतों पर बोझ कम होगा। यह व्यवस्था त्वरित और प्रभावी समाधान सुनिश्चित करेगी।
जुर्माने में स्वचालित वृद्धि: हर तीन साल में जुर्मानों या दंड में 10% की स्वचालित वृद्धि का प्रस्ताव है ताकि कानून का डर बना रहे और लोग नियमों का पालन करें।
चार प्रमुख कानूनों में बदलाव
इस विधेयक में चार अहम कानूनों के तहत और अधिक अपराधों को गैर-आपराधिक बनाया गया है:
चाय अधिनियम
लीगल मेट्रोलॉजी अधिनियम
मोटर वाहन अधिनियम
ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स अधिनियम
इसके अलावा, एनडीएमसी अधिनियम और मोटर वाहन अधिनियम के तहत 67 संशोधन विशेष रूप से नागरिकों के जीवन को और अधिक सुविधाजनक बनाने पर केंद्रित हैं।
यह विधेयक सरकार के उस दृष्टिकोण को दर्शाता है जिसमें नागरिकों पर विश्वास किया जाता है और छोटे उल्लंघनों के लिए सजा की बजाय सुधार पर जोर दिया जाता है। इस कदम से देश में व्यापार और जीवन की सुगमता में महत्वपूर्ण सुधार की उम्मीद है।

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