
बिहार सरकार के मंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता रामकृपाल यादव ने केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के बयानों पर तीखा पलटवार किया है। यादव ने आत्मविश्वास के साथ कहा कि आगामी चुनावों में भाजपा न केवल केरल, बल्कि पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु जैसे राज्यों में भी अपनी सरकार बनाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हो रहा विकास ही भाजपा की सबसे बड़ी शक्ति है और अब जनता विपक्ष के ‘पीछे धकेलने वाले’ एजेंडे को स्वीकार नहीं करेगी।
केरल में बढ़ते भाजपा के ग्राफ से विपक्षी दल भयभीत
रामकृपाल यादव के सुर में सुर मिलाते हुए भाजपा नेता शाहनवाज हुसैन ने भी केरल के मुख्यमंत्री पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि केरल में हाल के स्थानीय चुनावों और मेयर पद पर मिली जीत ने वामदलों और कांग्रेस की नींद उड़ा दी है। हुसैन के अनुसार, केरल के मुख्यमंत्री आजकल भाजपा के खिलाफ इसलिए आक्रामक हैं क्योंकि उन्हें अपनी सत्ता खिसकती नजर आ रही है। भाजपा का मानना है कि दक्षिण भारत में पार्टी के प्रति लोगों का नजरिया तेजी से बदल रहा है और इस बार जनता ने ‘परिवर्तन’ का मन बना लिया है।
बिहार के किसानों के लिए राहत: बेमौसम बारिश के नुकसान की होगी भरपाई
राजनीतिक बयानों के बीच, कृषि मंत्री रामकृपाल यादव ने बिहार के किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण घोषणा की। पिछले कुछ दिनों में राज्य के कई हिस्सों में हुई बेमौसम बारिश और तेज आंधी ने फसलों को भारी नुकसान पहुँचाया है। मंत्री ने जानकारी दी कि विशेष रूप से आठ जिलों में फसलों की बर्बादी की खबरें मिली हैं। उन्होंने किसानों को भरोसा दिलाया कि सरकार इस संकट की घड़ी में उनके साथ मजबूती से खड़ी है और प्रभावितों को उचित मुआवजा दिया जाएगा।
डीबीटी (DBT) के जरिए सीधे खातों में पहुंचेगी सहायता राशि
मंत्री ने बताया कि सभी संबंधित अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से नुकसान का आकलन करने और विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दे दिए गए हैं। जैसे ही जिला प्रशासन से रिपोर्ट प्राप्त होगी, आपदा प्रबंधन विभाग की राशि कृषि विभाग के माध्यम से सीधे किसानों के बैंक खातों में ‘डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर’ (DBT) के जरिए भेज दी जाएगी। यादव ने उल्लेख किया कि हाल ही में सरकार ने लगभग 200 करोड़ रुपये की सहायता राशि इसी पारदर्शी तरीके से वितरित की है और आगे भी यही प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
रामकृपाल यादव का यह रुख दर्शाता है कि भाजपा एक तरफ जहाँ चुनावी मैदान में आक्रामक विस्तार की रणनीति पर काम कर रही है, वहीं दूसरी ओर ‘अन्नदाता’ के प्रति अपनी संवेदनशीलता भी बरकरार रखे हुए है। केरल से लेकर बिहार के खेतों तक, भाजपा खुद को विकास और राहत के एकमात्र विकल्प के रूप में पेश करने की कोशिश कर रही है।

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