
मालेगांव में टीपू सुल्तान की तस्वीर को लेकर महाराष्ट्र की राजनीति गरमा गई है। संजय राउत ने सरकार को प्रशासनिक कार्रवाई की सलाह दी है, वहीं भाजपा ने इसे राष्ट्रीय नायकों का अपमान बताते हुए विपक्ष को घेरा है।
महाराष्ट्र के नासिक जिले के मालेगांव में टीपू सुल्तान के चित्र को लेकर शुरू हुआ विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस मुद्दे पर अब शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इस विवाद को अनावश्यक खींचने के बजाय राज्य सरकार को प्रशासनिक समाधान निकालने की सलाह दी है। साथ ही, राउत ने पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार के विमान हादसे को लेकर जनता के बीच उठ रही शंकाओं पर भी अपनी बात रखी।
सरकार आदेश जारी करे और तस्वीर हटाए: संजय राउत
मालेगांव नगर निगम के डिप्टी मेयर के कार्यालय में टीपू सुल्तान की तस्वीर लगाए जाने पर भाजपा और शिवसेना (शिंदे गुट) ने कड़ी आपत्ति जताई है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए संजय राउत ने कहा कि यदि किसी सरकारी कार्यालय में किसी विशेष चित्र को लेकर आपत्ति है, तो यह पूरी तरह से सरकार के अधिकार क्षेत्र का मामला है। उन्होंने पत्रकारों से कहा, “यदि राज्य सरकार को टीपू सुल्तान की तस्वीर से समस्या है, तो मुख्यमंत्री को एक स्पष्ट प्रशासनिक आदेश जारी करना चाहिए और उसे हटवा देना चाहिए। इसे लेकर माहौल खराब करने या अंतहीन बहस की आवश्यकता नहीं है।”
अजित पवार विमान हादसे पर जनता की शंकाएं
संजय राउत ने अजित पवार के निधन से जुड़ी परिस्थितियों पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि विपक्ष किसी व्यक्ति विशेष को निशाना नहीं बना रहा है, लेकिन जिस तरह से यह विमान हादसा हुआ, उसे लेकर महाराष्ट्र और देश की जनता के मन में गहरे सवाल हैं। राउत ने कहा कि लोग इसे महज एक सामान्य दुर्घटना मानने को तैयार नहीं हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि विपक्ष केवल जनता की आशंकाओं को स्वर दे रहा है और सरकार को इन संदेहों को दूर करना चाहिए।

भाजपा का तीखा हमला: ‘वोट बैंक की राजनीति’
दूसरी ओर, भाजपा ने इस मुद्दे पर विपक्षी गठबंधन को आड़े हाथों लिया है। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने इसे महान राष्ट्रीय नायकों का अपमान करार दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि मालेगांव के सरकारी कार्यालय में टीपू सुल्तान का चित्र तो लगाया गया, लेकिन छत्रपति शिवाजी महाराज, महात्मा गांधी और डॉ. भीमराव आंबेडकर जैसे महापुरुषों की तस्वीरें क्यों नहीं लगाई गईं? पूनावाला ने आरोप लगाया कि विपक्ष केवल वोट बैंक की खातिर राज्य की राजनीति को सांप्रदायिक रंग देने का प्रयास कर रहा है।
प्रशासनिक तनाव और राजनीतिक भविष्य
बता दें कि मालेगांव एक संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है और सरकारी दफ्तर में टीपू सुल्तान की तस्वीर लगने के बाद स्थानीय स्तर पर भी विरोध प्रदर्शन देखने को मिले हैं। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच चल रही इस जुबानी जंग ने आगामी चुनावों से पहले राज्य के राजनीतिक तापमान को बढ़ा दिया है। अब देखना यह है कि क्या राज्य प्रशासन संजय राउत की सलाह मानते हुए इस पर कोई आधिकारिक निर्देश जारी करता है या यह विवाद राजनीतिक रैलियों का हिस्सा बना रहेगा।

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