
महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर ऐतिहासिक पात्रों को लेकर जुबानी जंग तेज हो गई है। मालेगांव नगर निगम में टीपू सुल्तान की तस्वीर लगाने से शुरू हुआ विवाद अब शिवसेना (UBT) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीच ‘हिंदुत्व’ की लड़ाई में तब्दील हो गया है। शिवसेना-यूबीटी के सांसद संजय राउत ने भाजपा पर पलटवार करते हुए आरोप लगाया है कि जब सत्ताधारी दल के पास विकास का कोई मुद्दा नहीं होता, तब वे जानबूझकर हिंदू-मुस्लिम विवाद को हवा देते हैं।
संजय राउत का पलटवार: “बीजेपी के पास कोई काम-धंधा नहीं“
मीडिया से बातचीत करते हुए संजय राउत ने स्पष्ट किया कि मालेगांव डिप्टी मेयर के दफ्तर से टीपू सुल्तान की तस्वीर हटा दी गई है, इसलिए अब इस मुद्दे को खींचने का कोई मतलब नहीं है। उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा, “भाजपा के पास राष्ट्रहित या जनता से जुड़ा कोई ठोस मुद्दा नहीं है। यही कारण है कि वे हर छोटी बात को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश करते हैं।”
राउत ने भाजपा को इतिहास की याद दिलाते हुए कहा कि पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भी कर्नाटक विधानसभा में टीपू सुल्तान की सराहना की थी। उन्होंने यह भी दावा किया कि मुंबई महानगरपालिका में स्वयं भाजपा पार्षदों ने पूर्व में सड़कों का नाम टीपू सुल्तान के नाम पर रखने का प्रस्ताव दिया था।
बीजेपी का तीखा वार: “कहाँ खो गया तुम्हारा हिंदुत्व?”
इस विवाद में भाजपा और एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने आक्रामक रुख अपना रखा है। भाजपा विधायक राम कदम ने उद्धव ठाकरे पर सीधा हमला बोलते हुए उन्हें ‘सोनिया सेना’ का हिस्सा करार दिया। कदम ने कहा कि जिस प्रकार कांग्रेस नेता हर्षवर्धन सपकाल ने टीपू सुल्तान की तुलना छत्रपति शिवाजी महाराज से की है, वह अपमानजनक है।

राम कदम ने तंज कसते हुए कहा, “अगर आज बाला साहेब ठाकरे जीवित होते, तो वे शिवाजी महाराज का अपमान करने वालों को खुद अपने चाबुक से सबक सिखाते। लेकिन उद्धव ठाकरे ने अपना हिंदुत्व राहुल गांधी के चरणों में गिरवी रख दिया है। हाथ में रुद्राक्ष पहनने का ढोंग करने वाले नेता आज चुप क्यों हैं?”
विवाद की जड़: मालेगांव से लेकर कांग्रेस के बयान तक
बता दें कि इस पूरे विवाद की शुरुआत मालेगांव की डिप्टी मेयर निहाल अहमद के कार्यालय में टीपू सुल्तान की तस्वीर लगाने से हुई थी। विवाद तब और बढ़ गया जब महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने टीपू सुल्तान की तुलना महान मराठा शासक छत्रपति शिवाजी महाराज से कर दी। भाजपा और शिंदे गुट के कड़े विरोध के बाद प्रशासन ने तस्वीर तो हटवा दी, लेकिन बयानों की आग ठंडी नहीं हुई है।
शिवाजी महाराज बनाम टीपू सुल्तान: कूटनीतिक मोड़
बीजेपी का आरोप है कि उद्धव ठाकरे गुट सत्ता के लालच में उन लोगों के साथ खड़ा है जो शिवाजी महाराज के कद को छोटा करने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं, शिवसेना (UBT) इसे आगामी चुनावों से पहले ध्रुवीकरण की कोशिश बता रही है। महाराष्ट्र की राजनीति में ‘हिंदुत्व’ की विरासत पर अधिकार जताने की यह जंग अब टीपू सुल्तान के इर्द-गिर्द सिमट गई है, जो आने वाले दिनों में और भी उग्र हो सकती है।

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