
तमिलनाडु की एमके स्टालिन सरकार ने राज्य के उच्च शिक्षा क्षेत्र में डिजिटल पहुंच को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। सरकार की महत्वाकांक्षी मुफ्त लैपटॉप वितरण योजना, जिसे “उलगम उंगल कैयिल” (दुनिया आपके हाथों में है) नाम दिया गया है, का पहला चरण अपने समापन के करीब है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, अब तक राज्य भर के 9.37 लाख से अधिक कॉलेज छात्रों को लैपटॉप वितरित किए जा चुके हैं।
डिजिटल विभाजन पाटने की बड़ी पहल
वित्तीय वर्ष 2025-26 के राज्य बजट में घोषित इस योजना का मुख्य उद्देश्य छात्रों के बीच डिजिटल अंतर को खत्म करना है। मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने इस पहल की शुरुआत करते हुए कहा था कि उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हर युवा के पास आधुनिक तकनीकी उपकरण होने चाहिए। योजना के तहत दो साल की अवधि में कुल 20 लाख लैपटॉप बांटने का लक्ष्य रखा गया है। इसमें कला, विज्ञान, इंजीनियरिंग, कृषि और मेडिकल कॉलेजों के छात्र शामिल हैं।
पहले चरण का लक्ष्य और वित्तीय आवंटन
योजना के पहले चरण में सरकार ने 10 लाख छात्रों तक पहुंचने का लक्ष्य रखा था, जिसके लिए 2,172 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट आवंटित किया गया है। उच्च शिक्षा विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पुष्टि की है कि 9.4 लाख छात्र पहले ही लाभान्वित हो चुके हैं। शेष 60,000 लैपटॉप का वितरण मार्च 2026 के अंत तक पूरा होने की उम्मीद है। यह कदम छात्रों को वैश्विक अर्थव्यवस्था में प्रतिस्पर्धा करने के लिए तकनीकी रूप से सक्षम बनाने की रणनीति का हिस्सा है।

समस्याओं के समाधान के लिए ‘शिकायत पोर्टल’
छात्रों की सुविधा के लिए सरकार ने एक समर्पित शिकायत निवारण पोर्टल भी लॉन्च किया है। इस पोर्टल के माध्यम से छात्र अपनी पात्रता, डिवाइस वितरण में देरी या लैपटॉप में आने वाली किसी भी तकनीकी समस्या को दर्ज कर सकते हैं। फिलहाल, यह पोर्टल अंतिम वर्ष और प्री-फाइनल ईयर के छात्रों के लिए उपलब्ध है। अधिकारियों का मानना है कि इस पारदर्शी व्यवस्था से यह सुनिश्चित होगा कि कोई भी पात्र छात्र इस लाभ से वंचित न रहे।
दूसरे चरण की शुरुआत और चुनावी चुनौतियां
योजना का दूसरा चरण, जिसके तहत अन्य 10 लाख छात्रों को कवर किया जाएगा, मार्च 2026 के तीसरे सप्ताह से अप्रैल के पहले सप्ताह के बीच शुरू होने की संभावना है। हालांकि, आगामी विधानसभा चुनावों के कारण लागू होने वाली आदर्श आचार संहिता (Model Code of Conduct) इसमें बाधा बन सकती है। चुनाव आयोग के सूत्रों का कहना है कि यदि आचार संहिता लागू हो जाती है, तो वितरण जारी रखने के लिए आयोग की पूर्व अनुमति अनिवार्य होगी।
वितरण प्रक्रिया में बदलाव के संकेत
यदि चुनाव आयोग दूसरे चरण के वितरण की अनुमति देता है, तो इसके नियमों में बड़ा बदलाव होगा। चुनाव के दौरान किसी भी प्रकार के राजनीतिक लाभ को रोकने के लिए लैपटॉप का वितरण मंत्रियों या राजनीतिक प्रतिनिधियों द्वारा नहीं किया जाएगा। इसके बजाय, कॉलेज के प्रधानाचार्य और जिला स्तर के सरकारी अधिकारी ही छात्रों को लैपटॉप सौंपेंगे। प्रशासन का पूरा ध्यान इस बात पर है कि प्रक्रिया पूरी तरह प्रशासनिक और निष्पक्ष बनी रहे।
इस योजना के माध्यम से तमिलनाडु सरकार न केवल शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने का प्रयास कर रही है, बल्कि राज्य के युवाओं को ‘डिजिटल सशक्तिकरण’ के जरिए भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार कर रही है।

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