
तेलंगाना में स्थानीय निकाय चुनावों के अंतिम दौर के नतीजों और अध्यक्ष-उपाध्यक्ष पद के चुनावों ने राज्य की सियासत में नई हलचल पैदा कर दी है। मंगलवार को हुए घटनाक्रम में सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी ने सात और नगरपालिकाओं में अपनी जीत दर्ज की है। वहीं, मुख्य विपक्षी दल भारत राष्ट्र समिति (BRS) को महज एक निकाय से संतोष करना पड़ा। इस चुनावी प्रक्रिया के दौरान कई स्थानों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी झड़पें और भारी तनाव की स्थिति भी बनी रही।
लॉटरी ने बदला जनगांव और थोरूर का भाग्य
अविभाजित वारंगल जिले की दो नगरपालिकाओं—जनगांव और थोरूर—में मुकाबला बेहद रोमांचक रहा। यहाँ दोनों प्रमुख दलों के बीच वोटों का गणित बराबर होने के कारण विजेता का निर्णय लॉटरी के माध्यम से किया गया। दिलचस्प बात यह रही कि दोनों ही स्थानों पर किस्मत ने कांग्रेस का साथ दिया।
थोरूर नगरपालिका: यहाँ 16 सदस्यीय परिषद में बीआरएस के पास 9 और कांग्रेस के पास 7 सदस्य थे। हालांकि, पदेन सदस्यों (विधायक यशस्विनी रेड्डी और सांसद कडियम काव्या) के वोटों ने कांग्रेस की संख्या को भी 9 तक पहुंचा दिया। बराबरी के बाद हुई लॉटरी में कांग्रेस के श्रवण को अध्यक्ष घोषित किया गया।
जनगांव नगरपालिका: 30 सदस्यीय जनगांव परिषद में भी समीकरण कुछ ऐसा ही रहा। यहाँ बीआरएस और कांग्रेस दोनों पदेन सदस्यों के सहयोग से 16-16 के आंकड़े पर पहुंच गए। लॉटरी प्रक्रिया में कांग्रेस की बलमणि अध्यक्ष चुनी गईं, जबकि उपाध्यक्ष का पद बीआरएस समर्थित निर्दलीय के खाते में गया।
विपक्ष का आरोप और चुनावी हिंसा
विपक्षी दल बीआरएस ने कांग्रेस पर सत्ता के दुरुपयोग और अलोकतांत्रिक तरीकों का आरोप लगाया है। पूर्व मंत्री ई. दयाकर राव सहित कई नेताओं ने पदेन सदस्यों के वोटिंग अधिकार का विरोध करते हुए इसे “लोकतंत्र की हत्या” करार दिया। तीन नगरपालिकाओं में चुनाव को कोरम की कमी और कार्यकर्ताओं के बीच हुई हिंसक झड़पों के कारण स्थगित करना पड़ा। विपक्ष का कहना है कि सत्तारूढ़ दल गुंडागर्दी के दम पर निकायों पर कब्जा कर रहा है।

नगर निगमों में कांग्रेस का ‘क्लीन स्वीप’
116 नगरपालिकाओं के साथ-साथ सात नगर निगमों के नतीजे भी कांग्रेस के लिए उत्साहजनक रहे। कांग्रेस ने महबूबनगर, मंचेरियल, नलगोंडा और रामागुंडम नगर निगमों में मेयर और डिप्टी मेयर दोनों पदों पर जीत हासिल की।
निजामाबाद: यहाँ कांग्रेस का मेयर चुना गया, जबकि डिप्टी मेयर का पद एआईएमआईएम (AIMIM) को मिला।
कोठागुडेम: सीपीआई और कांग्रेस ने गठबंधन के तहत मेयर और डिप्टी मेयर के पदों को साझा किया।
करीमनगर: यहाँ भाजपा ने निर्दलीयों के साथ मिलकर नगर निगम पर अपना कब्जा बरकरार रखा।
स्थानीय निकायों में कांग्रेस की बढ़ती ताकत
इन नवीनतम नतीजों के बाद, 116 नगरपालिकाओं में से कांग्रेस की कुल संख्या 91 तक पहुंच गई है। हालांकि कांग्रेस को केवल 66 नगरपालिकाओं में स्पष्ट बहुमत प्राप्त था, लेकिन पार्टी ने अपनी रणनीतिक कुशलता, निर्दलीयों के समर्थन और पदेन सदस्यों के सहयोग से अन्य 25 निकायों में भी अपने अध्यक्ष बिठाने में सफलता पाई है। बीआरएस अब केवल 18 नगरपालिकाओं तक सीमित रह गई है, जबकि भाजपा को एक पर जीत मिली है और तीन जगहों पर निर्दलीय अध्यक्ष चुने गए हैं।
तेलंगाना के इन परिणामों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि राज्य में विधानसभा चुनाव के बाद अब स्थानीय स्तर पर भी कांग्रेस की पकड़ काफी मजबूत हो गई है, जिससे आने वाले समय में बीआरएस के लिए अपनी जमीन बचाना एक बड़ी चुनौती होगी।

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