
नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली के प्रतिष्ठित भारत मंडपम में आयोजित ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ उस समय विवादों के केंद्र में आ गई, जब इंडियन यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने आयोजन स्थल के भीतर घुसकर अनोखे ढंग से विरोध प्रदर्शन किया। इस हाई-प्रोफाइल अंतरराष्ट्रीय समिट के दौरान हुए ‘शर्टलेस’ (अर्धनग्न) प्रदर्शन के एक दिन बाद, अब संगठन ने महात्मा गांधी की तस्वीर साझा कर अपने इस कृत्य को वैचारिक आधार देने की कोशिश की है।
गांधीजी की तस्वीर और ‘एक्स’ पर पलटवार
प्रदर्शन के अगले दिन इंडियन यूथ कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की एक ऐतिहासिक तस्वीर पोस्ट की। इस पोस्ट के जरिए संगठन ने आलोचकों को जवाब देते हुए लिखा, “हम गांधी के वंशज हैं। शर्टलेस ही सही। कल भी लड़ रहे थे, आगे भी लड़ते रहेंगे।” यूथ कांग्रेस ने अपने आधिकारिक हैंडल से केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए एक अन्य पोस्ट में सवाल उठाया कि जब सत्ता पक्ष प्रदर्शन करता है तो वह देशभक्ति कहलाती है, लेकिन जब विपक्ष अपनी आवाज उठाता है तो उसे ‘नेशनल शेम’ या राष्ट्रीय शर्म क्यों करार दिया जाता है? संगठन का तर्क है कि जब सत्ता युवाओं की आवाज सुनने से इनकार कर देती है, तब इसी तरह के कड़े कदम उठाने पड़ते हैं।

भारत मंडपम में क्या हुआ था?
शुक्रवार को जब इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट के मंच पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के भविष्य और तकनीक पर चर्चा हो रही थी, तभी यूथ कांग्रेस के कुछ कार्यकर्ता सुरक्षा घेरा तोड़कर भीतर दाखिल हो गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने समिट के मुख्य डिस्प्ले बोर्ड के सामने अपनी शर्ट उतार दी और नारेबाजी शुरू कर दी।
इन कार्यकर्ताओं ने बेरोजगारी, बढ़ती महंगाई और हालिया भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर गुबार निकाला। समिट में मौजूद विदेशी प्रतिनिधियों और उद्योग जगत के दिग्गजों के सामने हुई इस घटना से अफरा-तफरी मच गई। सुरक्षा कर्मियों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया और उन्हें परिसर से बाहर निकाला।

अंतरराष्ट्रीय मंच पर साख का सवाल
चूंकि इस समिट में वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के साथ-साथ विदेशी प्रतिनिधिमंडल और ग्लोबल टेक कंपनियों के सीईओ शामिल थे, इसलिए इस घटना ने व्यापक राजनीतिक प्रतिक्रिया पैदा कर दी है। सत्ता पक्ष के नेताओं ने इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि को धूमिल करने की एक सोची-समझी साजिश बताया है। भाजपा नेताओं का कहना है कि विरोध का यह तरीका न केवल अभद्र है बल्कि देश की गरिमा के खिलाफ भी है।
दूसरी ओर, विपक्षी नेताओं ने यूथ कांग्रेस का बचाव करते हुए इसे लोकतंत्र में असहमति जताने का एक वैध अधिकार करार दिया है। उनका कहना है कि सरकार असल मुद्दों जैसे बेरोजगारी से ध्यान भटकाने के लिए प्रदर्शन के तरीके को मुद्दा बना रही है।
तकनीक, राजनीति और अभिव्यक्ति की बहस
इस घटना ने देश में तकनीक और राजनीति के संगम पर एक नई बहस छेड़ दी है। जहाँ एक तरफ सरकार भारत को ‘एआई पावरहाउस’ बनाने की दिशा में वैश्विक निवेश आकर्षित कर रही है, वहीं दूसरी तरफ जमीनी मुद्दों पर युवाओं का यह आक्रोश राजनीतिक अस्थिरता के संकेत दे रहा है। यूथ कांग्रेस का यह दांव कि वे ‘गांधी के मार्ग’ पर चल रहे हैं, सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है, जहाँ लोग प्रदर्शन के औचित्य और गरिमा को लेकर दो गुटों में बंटे नजर आ रहे हैं।
फिलहाल, पुलिस इस मामले में सुरक्षा चूक की जांच कर रही है और हिरासत में लिए गए कार्यकर्ताओं से पूछताछ जारी है। लेकिन यूथ कांग्रेस के आक्रामक रुख ने स्पष्ट कर दिया है कि वे आने वाले दिनों में महंगाई और बेरोजगारी के मुद्दे पर पीछे हटने वाले नहीं हैं।

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